क्या आपने कभी सोचा है कि कई बार पढे लिखे लोग भी जहां, पीछे रह जाते हैं, वही काम साधारण समझ वाले लोग कैसे कर जाते हैं? ऐसी मिसालें एक नहीं, कई हैं। एडीसन की बात हो या आइंसटीन की या आज के जमाने के बिल गेट्स, जिन्होंने पढाई अधूरी छोड़ दी। हमारे देश में भी कई ऐसे उद्योगपति हैं जो इतना ज्यादा भी पढ़े नहीं हैं, मगर अपने काम में उस्ताद है।

असल बात है कि वे अपने दिमाग का बेहतर उपयोग करते हैं। आप भी अपने दिमाग को विकसित कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है अपने दिमाग की सीमाओं को तोड़कर सोचना, फिर बात हो पढाई-लिखाई की या दैनिक जिंदगी में निर्णय लेने की।

आइये दिमाग का समुचित विकास करने के लिए कुछ दिमागी कसरतों की मदद ली जाये। नियमित रूप से इन्हें करने से आपके दिमाग में खुलकर सोचने की शक्तियों का विकास होगा और उसकी क्षमताओं का कुदरती ढंग से विस्तार होगा।
सबसे पहले चित्र शक्ति – यानी दिमाग में दृश्यों के चित्रण की क्षमता, इसके लिए आंखें बंद कीजिये और मन के परदे पर एक गोले की कल्पना कीजिये, अब एक चौकोर आकृति बनाइये और फिर त्रिकोण की रचना कीजिये।

इसे करके देखना महत्त्वपूर्ण है। कुछ लोग बड़ी सरलता से ये कर लेते हैं तो कुछ को धैर्य से काम लेना होगा।
अगर आपको मन के पटल पर ये आकृतियां न दिखाई दें तो एक कागज पर इन आकृतियों को बनाकर उन पर ध्यान केंद्रित कीजिये और फिर आंखें बंद करके उनकी रचना कीजिये। ये कोशिशें रंग लायेंगी ओर आपकी विचार पेशियों को इससे निश्चय ही बड़ा फायदा पहुंचेगा।

जब यह करना आपके लिए आसान हो जाये तो उसे दूसरे स्तर पर ले जायें, मनपटल पर गोलाकार आकृति की कल्पना कीजिये और उसे ही चौकोर और फिर त्रिकोण में बदलिये।

दूसरी महत्त्वपूर्ण क्षमता है ध्वनि के साथ खेलने की क्षमता – इसके लिए दिमाग में एक रेडियो की कल्पना कीजिये। अब कोई भी पंक्ति जो आपको अच्छी लगे, चुन लीजिये। शुरूआती समय में यह पंक्ति छोटी और सरल हो तो बेहतर रहेगा। उदाहरण के लिए- मेरा भारत महान।

अपने दिमाग में यह पंक्ति सुनिये। अब कल्पना कीजिये कि आपका दिमाग एक रेडियो है और नॉब घुमाकर आवाज थोड़ी कम कर दीजिये…धीरे-धीरे आवाज कम करते जाइये, इतनी कम कि वो सुनाई ही न दे। अब आवाज को तेज करना शुरू कीजिये और महसूस कीजिये ऊंचे स्वर में यह आवाज कैसी सुनाई देगी।

अब इस क्षमता को भी अगले स्तर तक ले चलिये। सोचिये कि यह पंक्ति बहुत धीमी गति से आपके दिमाग में बज रही है। फिर एकदम तेज गति से उसे दिमाग में चला कर देखिये। यह कसरत आपके दिमाग में सोचने-गढने की क्षमता का विस्तार करेगी और करने में मजा भी बहुत आयेगा।

इसके अलावा हर दिन कोई एक रंग चुन लीजिये और पूरे दिन उस रंग पर ध्यान केंद्रित कीजिये। देखिये आपकी जिंदगी में उस रंग की क्या भूमिका है। जब आप विशेष तौर पर एक रंग पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो आप हैरान रह जायेंगे क्योंकि आप ऐसी ऐसी जगह पर उस रंग को देखेंगे जहां पहले आपने ध्यान ही नहीं दिया होगा।

काला, सफेद, पीला, नीला, हरा, लाल लगातार कई दिनों तक आप यह अभ्यास कर सकते हैं।
इसके बाद आवाजों पर ध्यान केंद्रित कीजिये, एक दिन फुसफुसाहट और बहुत मद्घिम आवाजों पर ध्यान केंद्रित कीजिये। आपको हैरत होगी कि शोर शराबे के बीच भी आप झींगुर की आवाज, चिड़िया का चहकना और कभी टपकी बूंदों की टप-टप सुन पायेंगे। इसके अलावा कुत्तों के भौंकने को अपना विषय बनाइये। देखिये अलग-अलग कुत्ते किस तरह भौंकते हैं, मसलन एक अलसेशियन और एक पामेरियन के भौंकने में क्या फर्क है, या फिर यह कि गुस्से में भौंकते कुत्ते और मिमियाते कुत्ते की आवाज में क्या फर्क है।

देखते ही देखते आपकी क्षमता बढ जायेगी। यह न समझिये कि इससे सिर्फ आपकी देखने और सुनने की क्षमता बढ रही है क्योंकि इससे आपके दिमाग के सुप्त केंद्र जग रहे हैं। चीजों के बीच जो बारीक फर्क है उसे समझने की शक्ति जागृत होगी। एक सामान्य व्यक्ति और एक पेशेवर में सबसे बड़ा फर्क यही होता है कि जीनियस बारीकियां भी समझता है और उनको ख्याल में रखकर चुनाव कर सकता हैऔर निर्णय ले सकता है।

इन कसरतों को कर के देखिये और खुद को आश्चर्यचकित कर दीजिये।
– पुनीत भटनागर