सत्संगियों के अनुभव
पूज्य बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज का रहमो-करम

तुझे पांचवें दिन को ग्यारह बजे लेकर जाएंगे

प्रेमी कबीर दास, निवासी गांव महमदपुर रोही जिला फतेहाबाद। प्रेमी जी ने अपने सतगुरु बेपरवाह मस्ताना जी महाराज की एक अपार रहमत का वर्णन लिखित में इस प्रकार बताया है।

सन् 1978 की बात है। उस दिन मेरी पत्नी नानककौर ने मुझे बताया कि सार्इं मस्ताना जी महाराज के मुझे साक्षात दर्शन हुए। बेपरवाह जी ने फरमाया है कि वो आज से पांचवें दिन, मुझे ग्यारह बजे लेकर जाएंगे। मैंने अपनी पत्नी से पूछा कि तुझे कहां लेकर जाएंगे। वह बोली, सतगुरु जी सचखंड लेकर जाएंगे। वह पूज्य शहनशाह जी के दर्शन करके बहुत खुश थी। मैंने उक्त सारी बात साध-संगत में बता दी।

डेरा सच्चा सौदा अमरपुरा धाम महमदपुर रोही में तथा दरबार के आस-पास के गांवों-शहरों व ढाणियों की सारी साध-संगत को भी उक्त घटना का पता चल गया। कुछ प्रेमियों ने आपस में विचार-विमर्श किया कि अपने डेरा सच्चा सौदा में मौजूदा दूसरे पातशाह परम पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के चरणों में अर्ज करते हैं कि बीबी नानक कौर की आयु बढ़ा दें जी। अगर सतगुरु चाहें तो आयु बढ़ा सकते हैं। इस सम्बंध में गांव महमदपुर रोही, बीघड़ तथा फतेहाबाद शहर की कुछ साध-संगत कैंटर भर कर डेरा सच्चा सौदा सरसा दरबार में पहुंची।

वह दिन नानक कौर का पांचवां व अंतिम दिन था। साध-संगत पूज्य परम पिता जी से मिली। बीघड़ गांव के एक प्रेमी चन्नण सिंह ने सर्व-सामर्थ दाता शहनशाह परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के पवित्र चरणों में उक्त सारी वार्ता बताते हुए अर्ज की कि पिता जी, इस बहन (नानक कौर) को उम्र के दस-बीस साल और बख्शो जी।

इस पर पूज्य परम पिता जी ने वचन फरमाया, ‘भाई, यह मृतलोक तो काल का देश है। इसको अपने निजघर, असली घर (सचखंड) जाने दो। खुशियां ऐश बहारें लूटने दो।’ सतगुरु प्यारे ने इसके साथ ही एक उदाहरण देकर भी समझाया कि ‘जिस तरह किसी इन्सान को किसी जुर्म के बदले बीस साल की कैद (जेल) हो जाए। कैद का समय पूरा होने पर जेल सुपरडैंट उस कैदी को छोड़ने का कार्ड दे देता है और उस कैदी को बता देता है कि तेरी जेल की सजा पूरी हो चुकी है, व तू अपने घर जा सकता है।

अगर उसके साथ वाले कैदी यह कहें कि सुपरडैंट साहिब, इसको दस-बारह साल हमारे पास (कैद में) और रहने दो। उन कैदियों के कहने पर न तो वह रहेगा और न ही वह रख सकते हैं। इसी तरह भाई। इस बीबी की जेल यानि चौरासी लाख जूनियों का चक्र खत्म हो चुका है। उसकी आत्मा को सचखंड जाने दो। इसके रास्ते में रोड़े न अटकाओ।’ पूज्य शहनशाह जी ने फरमाया कि अब तुम घर जाओ।

वह बीबी, नारा बोलने वाली है।’ हम सभी लोग उसी समय आज्ञा लेकर वापिस अपने घर की तरफ चल पड़े। तब तक अंधेरा लगभग हो गया था। घर पहुंच कर हमने अभी चाय-पानी ही लिया था कि इतने में मेरी पत्नी ने इशारे से मुझे अपने पास बुलाया और कहा कि शहनशाह मस्ताना जी महाराज आ गए हैं। मैं अपने घर (सचखंड) अपने सतगुरु की गोद में बैठ कर जा रही हूं। इतना कहकर उसने, धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा नारा बोला और बेपरवाह जी द्वारा दिए गए समय व वचनानुसार उसने अपना चोला छोड़ दिया। अपने सतगुरु से ओड़ निभा गई।

सतगुरु जी अपनी प्यारी व संस्कारी रूहों को ऐसे ही ले जाते हैं, जैसे बीवी नानक कौर को ले गए। शरीर छोड़ते समय ऐसी रूहों को न कोई दुख होता है न कोई रंजो गम। ऐसी रूहें खुशी-खुशी अपने मालिक सतगुरु के साथ अपने असली घर सतलोक सचखंड चली जाती हैं।