दावत देने से पहले

हमारे दैनिक जीवन में खान-पान का विशेष स्थान है। बात अगर दावत की हो तो और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है। खाने की मेज पर हमें किसी के व्यक्तित्व को निकट से देखने और परखने का अवसर मिलता है।

अत: खाने की मेज पर खाने से लेकर परोसने की कला अपने आप में ही महत्त्वपूर्ण है। मेज पर शिष्टाचार ऐसा होना चाहिए कि मेजबान मेहमान पर और मेहमान मेजबान पर अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ सकें। यह शिष्टाचार कुशल व्यवहार यदा-कदा ही नहीं, वरन् अपनी दिनचर्या में शामिल करें तथा अपने व्यक्तित्व में निखार लाएं।

मेजबान के शिष्टाचार
भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता की तरह पूजा जाता है।

‘अतिथि देवो भव:

अत: जब भी घर में मेहमान आते हैं चाहे दावत के विषय में हो या यदा कदा मिलने के लिए घर पर पधारें, उनका अभिवादन व आदर-सत्कार दिल से करें। उन्हें यह प्रतीत कराएं कि वे आपके लिए विशिष्ट हैं।

किसी को दावत पर बुलाना है तो विशेष तैयारी करनी आवश्यक है क्योंकि दस लोगों को घर में बुलाकर खाना खिला देने का अर्थ दावत नहीं होता, वरन् दावत शब्द अपने आप में ही मौज मस्ती तथा एक अच्छा समय साथ-साथ बांटने का भाव है। अत: सफल दावत के लिए हमें कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है।

दावत से एक या दो दिन पहले घर की सफाई अच्छी तरह कर लेनी आवश्यक है क्योंकि दावत के दिन रसोईघर से छुट्टी मिलने की संभावना कम रहती है। घर के ड्राईंग रूम तथा डाइनिंग रूम के साथ-साथ टॉयलेट आदि की सफाई करना न भूलें। कई बार ऐसा भी होता है कि दावत के दिन गृहस्वामिनी स्वयं नख शिख शृंगार से लदी होती है किन्तु घर की सफाई के साथ-साथ टॉयलेट व रसोई के लिए समय नहीं निकाल पाती। यह उनकी अपनी फूहड़ता का ही परिचय देती हैं।

मेनू

आजकल दावतों में बहुत अधिक व्यंजन बनाने का फैशन नहीं रहा। बल्कि एक-दूसरे के साथ मेल खाते चुनिंदा व्यंजन बनाएं। मुगलाई बनाना हो तो सभी एक-दूसरे से मेल खाते हों। चाइनीज व मुगलाई एक साथ पेश न करें। व्यंजनों की कुछ तैयारी दावत के पहले दिन ही कर लें ताकि दावत के दिन आप तनावयुक्त न हों और न ही थकी व निढालसी लगें।
दावत में चाय, नाश्ते, लंच व डिनर के अनुसार व्यंजन बनाएं। पूरी, पकौड़ी, रोटी आदि गरम मिलने का इंतजाम करें। भोजन से पूर्व सूप की व्यवस्था करें।

टेबल मैट, नैपकिन, नमक, काली मिर्च आदि औपचारिकताएं मेज पर रखना अनिवार्य है। जगह कम हो तो बुफे सिस्टम करें। खाना लगाने से 10 या 15 मिनट पूर्व गर्म करें तथा डोंगे में रखें। आजकल हॉट-केस का प्रचलन है जिसमें खाना आठ घण्टे तक भी गर्म रह सकता है।

बैठने की व्यवस्था

दावत में बैठने की व्यवस्था बच्चे, जवान व बूढ़ों को मद्देनजर रखते हुए करनी चाहिए। दावत में बच्चे भी आ रहे हों तो उनकी खेलने की व्यवस्था से लेकर बैठने तथा उनके आराम की व्यवस्था देखकर करनी चाहिए। उन्हें खाना कांच के बर्तनों की बजाय अनब्रेकेबल बर्तनों में दें तो अधिक सुविधाजनक होगा।

अगर अन्य मेहमानों को भी बैठाकर खिलाने की व्यवस्था करनी हो तो कुर्सी की दूरी इतनी रहे कि एक-दूसरे से बातचीत करने में सुविधा रहे। रोशनी के विषय में भी आप ध्यान दें। ड्राईंग रूम में हल्की रोशनी करनी हो तो चलेगा किन्तु डाइनिंग रूम में अधिक रोशनी की आवश्यकता है। जब सवाल साथ में बच्चों के खाने का हो तो ‘कैन्डल लाइट डिनर’ बच्चों व बूढ़ों के साथ न करें तो बेहतर होगा।

अन्य आवश्यक बातें


→ आप जब कभी दावत की योजना बनाएं तो घर में बैठने की व्यवस्था, बजट आदि को ध्यान में रख कर ही मेहमानों को निमंत्रित करें।

→ घर में मेहमान आने से आधे घंटे पूर्व अपने काम निपटा लीजिए।

→ हर मेहमान के पास कुछ देर बैठकर आवश्यक बातें करें क्योंकि वे आपके साथ खाना खाने के अतिरिक्त आपके साथ कुछ समय मनोरंजन के लिए भी आए हुए हैं।

→ अपने मेहमानों के समक्ष अपनी व्यस्तता तथा अपनी थकान को न दर्शाएं क्योंकि आपकी इस स्थिति को देखकर मेहमानों को बुरा लग सकता है।

→ मेहमानों को विदा करते समय उनके आने का धन्यवाद प्रकट करें। अपने व्यवहार से यह प्रकट न करें कि जैसे-तैसे खाना खिलाकर आपने काम निपटाया है।

मेहमान के शिष्टाचार, मेजबान के साथ
मेहमान के शिष्टाचार भी अपने आप में महत्त्वपूर्ण हैं। किसी के घर दावत में या यदा कदा मिलने जाने पर भी कुछ औपचारिकताएं है जिन्हें मेहमानों को विशेष ध्यान में रखने की आवश्यकता है। आप जिस समय पर आमंत्रित हैं उसी समय या उससे दस पांच मिनट आगे पीछे, मेजबान के घर जाएं किन्तु बहुत पहले जाने से मेजबान को परेशानी हो सकती है क्योंकि उन्हें मेहमानों की व्यवस्था के प्रबंध के साथ-साथ अपने घर के काम भी निपटाने होते हैं इसलिए शायद वह अपने आपको प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे।

अपने बच्चों के साथ जाने से पूर्व उन्हें सभी प्रकार के शिष्टाचार से अवगत कराएं ताकि किसी भी स्थिति में आपको शर्मिंदा न होना पड़े। समय से अधिक लेट न पहुंचें, क्योंकि मेजबान के अन्य कार्यक्रम भी हो सकते हैं। किसी कारण से आप दावत में न पहुंच रहे हों तो पहले ही क्षमा मांग लेना उचित है।

यह अत्यंत आवश्यक है कि आप खाने की तारीफ करना न भूलें। दावत से लौटते समय भी आप एक बार फिर खाने की प्रशंसा व धन्यवाद देना न भूलें।  – रूबी