तिरंगा रूमाल छू’ लीग ने मचाया धमाल तूफानी शेरों ने जीता 50 लाख का ईनाम

अध्यात्म व सामाजिक सरोकार से जुड़ी संस्था डेरा सच्चा सौदा समाज व देशहित में दिन-रात प्रयासरत है। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां, जहां अध्यात्म की गंगा बहा रहे हैं, वहीं हर क्षेत्र के कल्याण के लिए जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में पूज्य गुरु जी खेल जगत को विशेष रूप में अपनी तवज्जो बख्श रहे हैं। उनका मकसद देश में खेलों का स्तर ऊंचा उठाना और युवाओं में खेलों के प्रति उत्साह बढ़ाना है। ज्ञातव्य है कि पूज्य गुरु जी स्वयं भी एक बेस्ट प्लेयर हैं और उन्होंने खुद 32 नेशनल गेम्स खेलें हैं और अब भी खेलते हैं तथा हर खेल के बारे पूरी जानकारी भी रखते हैं। यही कारण है कि डेरा सच्चा सौदा के शिक्षण संस्थानों में खिलाड़ियों का बहुत बड़ा दल है और देश के कुल मैडलों का 10 प्रतिशत मैडल इस संस्था के हिस्से आते हैं।

पूज्य गुरु जी अक्सर ही डेरा सच्चा सौदा में गेम्स करवाते रहते हैं और युवाओं को इस ओर अग्रसर कर रहे हैं। जहां विशेष बात यह है कि पूज्य गुरु जी केवल आधुनिक खेलों को बढ़ावा नहीं दे रहे, बल्कि हमारे लुप्तप्राय प्राचीन खेलों को भी बराबर लेकर चल रहे हैं। यह उनका विशाल नजरिया है। अपितु आज के युवा उन खेलों के नाम तक नहीं जानते, खेलना तो दूर की बात है। जैसे खुदो-खुण्डी, गुल्ली-डंडा, बांदर किला, लंगड़ा शेर, अंधा झोटा, पिट्ठू, बांस से धकेलना, रस्साकशी, कबड्डी इत्यादि कई ऐसे परम्परागत खेल हैं, जिन्हें आज लोग भूल चुके हैं।

मगर आप इन खेलों को डेरा सच्चा सौदा में होने वाले खेल-आयोजनों में कभी भी देख सकते हैं। क्योंकि पूज्य गुरु जी हमारे देश की प्राचीन धरोहर के प्रहरी हैं और इन खेलों को नई पीढ़ी तक लेकर जा रहे हैं। यही नहीं, इन परम्परागत खेलों को रूचिकर बनाते हुए पूज्य गुरु जी ने इनमें आधुनिकता का समावेश करके इनके ग्राफ को और ऊपर उठा दिया है।

जैसे गुल्ली-डंडे को प्राचीन व पिछड़ा हुआ खेल समझा जाता है, जबकि पूज्य गुरु जी ने इस खेल में क्रिकेट, बेसबॉल इत्यादि का समायोजन करके इसे बेहद इंटरेस्टड बना दिया है और इस खेल को ‘गुलस्टिक’ का नाम देकर इसको नए खेलों की धार दी है। इस प्रकार ‘रूमाल छू’ को भी सुधार कर इसमें नयापन जोड़ दिया है, जो पहले से कई गुणा मनोरंजक हो गया है। वहीं अब यह एक प्रोफेशनल गेम बन गया है। अभी पिछले दिनों इस खेल का आयोजन डेरा सच्चा सौदा में हुआ, जिसने पूरी दुनिया में धूम मचा दी है।

पहला ‘तिरंगा रूमाल छू’ का आयोजन:-

गत 22 अगस्त से 28 अगस्त तक देश-दुनिया के आम लोगों व खेल प्रेमियों ने ‘तिरंगा रूमाल छू’ लीग टूर्नामेंट को देखा व पूरा लुत्फ उठाया। यह टूर्नामेंट एमएसजी आल ट्रेडिंग प्रा.लि. कंपनी की ओर से करवाया गया था। प्राचीन व आधुनिक रंग में रंगा हुआ यह खेल टूर्नामेंट बेहद लोकप्रिय हो गया। दर्शकों ने सप्ताहभर इस खेल का रोमांच देखा और इसकी रंग-रौणक के दीवाने हो गए। यह खेल तो केवल एक ही था, जो ‘रूमाल छू’ है, लेकिन इसमें दर्शकों को कई खेलों के रंग-रूप देखने को मिले। जब दर्शक दो खिलाड़ियों को भिड़ते हुए देखते तो उन्हें यह नेशनल कबड्डी या सर्कल कबड्डी या फिर कुश्ती वाला नजारा दिख रहा था।

जब दो खिलाड़ी रूमाल उठाने की फिराक में चक्कर काटते दिखते, तो दर्शकों को ‘रूमाल छू’ खेल का लुत्फ आ रहा था। वहीं जब एक खिलाड़ी को टच करने की मशक्कत में दूसरा उसके पीछे रफ्तार से दौड़ता, तो दर्शकों के लिए यह नजारा खो-खो वाला होता। जब खिलाड़ी एक-दूसरे को पटखनी देकर रिंग यानि टच लाईन से बाहर करने की फिराक में होते, तो मैदान कुश्ती का दंगल नजर आता। अर्थात् यह टूर्नामेंट इतना रूचिकर था कि खेल का हर प्वार्इंट रोमांच से भरा हुआ था। इतना रोमांच कि दर्शक नजरें गढ़ाए रह जाते और पता भी नहीं चलता कि मैच कब खत्म हो जाता। हर कोई जुबां से यही कह उठता कि ओह, मैच खत्म भी हो गया! वाह, बहुत मजा आया! काश, अभी और चलता…!

मिला नया रंग-रूप:-

दर्शकों को बांधकर रखने वाला और खिलाड़ियों की पूरी जोर-अजमाईश करवाने वाले इस खेल को पूज्य गुरु जी ने नए रंग-रूप में ढालकर इसे नेशनल ही नहीं, इंटरनेशनल स्तर का गेम बना दिया। इस रूमाल छू में पूज्य गुरु जी द्वारा नेशनल कबड्डी, सर्कल कबड्डी, खो-खो, दौड़ व एथलेटिक्स सहित जूडो खेल को भी मिक्स-अप किया गया है। इन सारे खेलों का यह एक कोम्बो है, जो कि आज के मिश्रित प्रचलन को सामने रखकर बनाया गया है।

इसका एक नपा-तुला ग्राऊंड है और इसे कायदे-कानूनों के अंतर्गत खेलने का विधान बनाया गया है। अर्थात् पूज्य गुरु जी ने इस प्राचीन खेल को आधुनिक रूप देते हुए इसे हर दृष्टिकोण से रोमांचक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पूज्य गुरु जी ने अपने निजी अनुभवों से इस खेल के अंदर ऐसा रोमांच पैदा कर दिखाया है कि खिलाड़ियों को भी ऐसा न लगे कि वो कोई प्राचीन व देहाती गेम खेल रहे हैं। पूज्य गुरु जी ने इस खेल की ऐसी कैमेस्ट्री बनाई है कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। आधुनिकता की रंगत में परम्पराओं का निर्वाह व प्रवाह पूज्य गुरु जी के इस गेम से स्पष्ट झलकता है।

गेम शेड्यूल:-

एमएसजी आल ट्रेडिंग इंटरनेशनल प्रा.लि. कंपनी द्वारा आयोजित इस पहले ‘तिरंगा रूमाल छू’ लीग का पूरा शेड्यूल 22 से 28 अगस्त तक रहा। इसके सारे मैच लीग सिस्टम के आधार पर खेले गए। इस लीग में कुल आठ टीमें थी, जिनके दो पूल बनाए गए थे। पूल ‘ए’ और पूल ‘बी’ के बीच इन टीमों को रखा गया। इन दोनों पूल में से एक-एक टीम को फाइनल के लिए रखा गया था। प्रत्येक पूल में से जिस टीम के अंक ज्यादा थे, उन दोनों के बीच फाइनल मुकाबला खेला जाना तय किया गया था। शेड्यूल के अनुसार ये गेम रोजाना रात्री 8:30 बजे से लेकर 10:00 बजे तक खेले गए। प्रत्येक दिन दो मैच खेले गए। इस प्रकार 22 अगस्त से लेकर 27 अगस्त तक कुल 12 मैच खेले गए और 28 अगस्त को फाईनल 13वां मैच खेला गया। यह टूर्नामेंट कमाल का था, जिसके हर मैच का दर्शकों ने पूरा इंजॉय किया।

यहां यह भी बता दें कि इन सभी मैचों का लाईव प्रसारण किया गया था, जिससे देश-दुनिया के लोग टीवी तथा यू-ट्यूब के माध्यम से बंधे रहे। क्योंकि सर्वधर्म संगम टीवी चैनल के अलावा दूरदर्शन के डीडी स्पोर्ट्स चैनल द्वारा भी यह लाईव किया गया। इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान लोगों पर इस लीग का ही खुमार चढ़ा रहा। इसे बच्चे, नौजवान तो देख ही रहे थे, और बुजुर्गों ने भी बड़े उत्साह के साथ हर मैच को देखा और अपनी पुरानी यादों में खोए रहे। दर्शकों में इतना उत्साह देखा गया कि जैसे-जैसे खिलाड़ी अपना जोर लगाते, वैसे-वैसे ही दर्शक भी जोर-अजमाईश करने लग जाते। बल्कि ऐसे लग रहा था कि खिलाड़ियों से ज्यादा जोर दर्शकों का लग रहा है। दर्शकों पर इसका फुल फेवर चढ़ा हुआ था।

कुछ ऐसे थे टीमों के नाम:

जिस प्रकार का जोशीला टूर्नामेंट रहा, ऐसे ही प्रत्येक टीम का नाम भी आकर्षक व पूरे जोश-खरोश से लबालब था। टीम का नाम सुनकर दर्शक उत्साह से भर जाते। इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली आठ टीमों के नाम थे-

पूल ए

* एमएसजी तूफानी शेर * एमएसजी राजस्थानी सूरमा * एमएसजी यूपी जांबाज* एमएसजी आस्ट्रेलियन बे्रव बॉयज

पूल बी

* एमएसजी लठ गाड़ दे हरियाणा * एमएसजी चक्क दे फट्टे पंजाब * एमएसजी दिल्ली के दिलेर * एमएसजी कैनेडियन कॉओबॉयज

आईपीएल की तर्ज पर हुआ टूर्नामेंट:-

इस परम्परागत खेल को नये रंग-रूप के साथ रोचक बनाते हुए इसे पेशेवर गेम बना दिया गया, ताकि खिलाड़ियों को उनकी मेहनत का फल मिले। इस टूर्नामेंट के लिए आईपीएल की तरह खिलाड़ियों के लिए बोली लगाई गई थी, जिसमें प्रत्येक खिलाड़ी के लिए कम से कम 50 हजार बेसिक राशि रखी गई थी। अर्थात् टीम के मालिक ने खिलाड़ियों को बोली प्रक्रिया के तहत खरीदा, जिसमें खिलाड़ियों को पूरा आर्थिक लाभ भी मिला।

वहीं प्रत्येक मैच के लिए ‘मैन आफ द मैच’ भी चुने गए और उन्हें जापानी कंपनी आॅकीनावा का इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल दिया गया। इसी प्रकार ‘मैन आफ द टूर्नामेंट’ का भी चुनाव किया गया और उसे ऑल्टो के-10 कार दी गई। इस प्रकार इस खेल प्रतियोगिता में कुल 14 खिलाड़ियों को मैन आफ द मैच चुना गया और वो इलेक्ट्रिक बाईक के विजेता बने। इस टूर्नामेंट में ‘एमएसजी लठ गाड़ दे हरियाणा’ के खिलाड़ी पवन कुमार व राजस्थानी सूरमा के अनुज दो बार मैन आफ द मैच घोषित हुए। वहीं मैन आफ द टूर्नामेंट रहे ‘एमएसजी तूफानी शेर’ के खिलाड़ी रमेश कुल 39 अंक बनाकर ऑल्टो के-10 कार के विजेता बने।

एमएसजी तूफानी शेर बने विजेता:-

इस पहले ‘तिरंगा रूमाल छू’ लीग टूर्नामेंट में 50 लाख व 30 लाख रुपए की बम्पर इनामी राशि रखी गई थी। विजेता टीम के लिए 50 लाख रुपए और उपविजेता को 30 लाख रुपए दिए गए। फाईनल मैच एमएसजी तूफानी शेर व एमएसजी दिल्ली के दिलेर टीम के बीच खेला गया था। इसमें तूफानी शेरों ने दिल्ली की टीम के छक्के छुड़ा दिए। ये दोनों टीमें अपने-अपने तीन-तीन मैच जीतकर फाईनल में पहुंची थी। दोनों टीमों ने अपने-अपने पूल में किसी टीम से मात नहीं खाई थी। दिल्ली की टीम का पिछला रिकॉर्ड देखकर लग रहा था कि यह टीम तूफानी शेर को मात दे सकती है, नहीं तो कम से कम कड़ी टक्कर तो जरूर देगी,

लेकिन जो दिल्ली के दिलेरों ने दिखाया, वो अप्रत्याशित था। ऐसे लग रहा था कि उन्होंने घुटने टेक दिए हैं। अच्छी शुरुआत करने के बाद मैच एक तरह से उनके हाथ से छुटने लगा और लगभग एक तरफा हो गया। कहीं भी दिल्ली की टीम खड़ी न दिखी। तूफानी शेरों के सामने जैसे उन्होंने हाथ खड़े कर दिए हों! तूफानी शेरों ने अपनी शेरों सी चुस्ती-फुर्ती दिखाते हुए दिल्ली को 76-46 अंकों के बड़े अंतर से हराकर बम्पर इनामी राशि 50 लाख रुपयों पर अधिकार जमा लिया। दिल्ली की टीम को 30 लाख ईनामी राशि पर ही संतोष करना पड़ा।

तूफानी शेर टीम को पूज्य गुरुजी की सुपुत्री आदरणीय साहिबजादी हनीप्रीत जी इन्सां ने खरीदा हुआ था। वाकई उनकी टीम ने उम्मीदों पर खरे उतरते हुए साहिबजादी बहन को इस जीत का महान् तोहफा दिया। इस पूरे टूर्नामेंट में आदरणीय बहन जी अपनी टीम की हौसला-अफजाई करती रहीं। फाईनल मैच में तो उनका पूरा जोर लग रहा था। जैसे ही टीम के जीतने की घोषणा हुई, आदरणीय बहन जी टीम का झंडा लेकर पूरे जोश-खरोश के साथ इस जीत को सेलिब्रेट कर रहीं थीं। वहीं इस अवसर पर पूरे आदरणीय शाही परिवार के सदस्यगण भी मौजूद थे, जिन्होंने इस शाही जीत का खूब जश्न मनाया।

एमएसजी तूफानी शेर टीम ने शुरु से ही शानदार प्रदर्शन किया तथा इनका काँफिडेंस लेवल बहुत ज्यादा है। इस टीम के खिलाड़ी उत्साहित तो थे, लेकिन उत्तेजना नहीं थी। इस टूर्नामेंट में कोई भी खिलाड़ी फिक्सिंग नहीं कर सकता और भविष्य में भी उन्हीं खिलाड़ियों को चुना जाएगा, जो अच्छा खेलेंगे।

-पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां

पूज्य गुरु जी के आशीर्वाद से ही हमारी टीम विजेता बनी है। पूज्य गुरु जी ने सभी टीमों को टैक्नीक्स बताई थी, और मुझे खुशी है कि मेरी टीम ने उन टैक्नीक्स को फॉलो करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। मैच में जहां खिलाड़ियों का जोर लग रहा था, वहीं प्रशसंकों का भी खूब जोर लग रहा था।
-आदरणीय साहिबजादी हनीप्रीत जी इन्सां,
ऑनर ‘एमएसजी तूफानी शेर’

अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यवस्था:-

‘तिरंगा रूमाल छू’ लीग का आयोजन किसी अंतरराष्ट्रीय आयोजन से कम नहीं लग रहा था। खिलाड़ियों व दर्शकों के खाने-पीने तथा निवास के इंतजाम बाखूबी किए गए थे। इसके साथ ही स्टेडियम भी जोकि मात्र 2-3 दिन पहले ही बनाया गया था, भव्य नजारा पेश कर रहा था। स्पर्धाओं के लिए खेल मैदान में बिछा हुआ सिंथेटिक मैट अति सुंदर था, जिस पर अपनी-अपनी वर्दियों में सजे हुए खिलाड़ी भव्य आयोजन को मनमोहक बना रहे थे। हर टीम की अपनी ही ड्रेस थी और अपना ही एक सुंदर झंडा था, जिसकी छत्रछाया में वे अपना प्रदर्शन कर रहे थे।

हर दिन मैच की शुरुआत राष्ट्रीय गान की धुन से की गई, जिससे राष्ट्रीयता का भाव हिलोरे लेने लग जाता। राष्ट्रभक्ति के साथ हर मैच की शुरुआत काबिले-तारीफ थी। ‘जन-गण-मन’ की धुन के बाद पूज्य गुरु जी द्वारा बनाया गया ‘हट पीछे चल पीछे’ गीत स्टेडियम में पूरी धूम मचा देता। इस एंथम गीत को पूज्य गुरु जी ने स्वयं ही कम्पोज किया, स्वयं ही गाया है और इसकी धुन भी स्वयं ही बनाई थी।

इसके अलावा टूर्नामेंट में थर्ड अम्पायर की विशेष सुविधा उपलब्ध थी। टीम के कप्तान को किसी संशय पर थर्ड अम्पायर के लिए अपील करने का अधिकार था। इसका भी जरूरत के अनुसार उपयोग किया गया। इसके लिए टीम को दो मौके दिए जाते। कप्तान या खिलाड़ी का ऑब्जेक्शन सही पाए जाने पर यह चांस सेव रहता और दोनों ऑब्जेक्शन गलत पाए जाते हैं, तो इसका चांस खत्म हो जाता है। ऐसा इस टूर्नामेंट में देखने को मिला, जोकि इस खेल का नियम है। वहीं टीम को टाईम आउट लेने की भी सुविधा दी गई थी, ताकि किसी खिलाड़ी को चेंज किया जा सके, अगर कोई टीम मैनेजर या कैप्टन ऐसा चाहता है। इस सुविधा का हर टीम ने भरपूर फायदा उठाया।

खेल पंच के द्वारा खिलाड़ियों को कार्ड दिखाकर समय-समय पर उन्हें चेतावनी भी दी जाती थी। कोई भी खिलाड़ी अनुशासन से बाहर जाकर नहीं खेल सकता। अगर कोई खिलाड़ी मनमानी करता है, तो ग्रीन कार्ड देकर सुधरने का चांस दिया जाता है और दोबारा गलती दोहराने पर उसे येलो या रेड कार्ड दिखाकर उसे मैच से बाहर या पूरे टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। वैसे इस टूर्नामेंट में ग्रीन कार्ड तो जरूर दिखाए गए, लेकिन येलो या रेड कार्ड दिखाने की नौबत आई ही नहीं, क्योंकि सभी खिलाड़ियों ने अनुशासनबद्ध तरीके से खेल दिखाया।

मैच में पंच-सरपंच:-

हमने गांव की शासन प्रणाली में पंच-सरपंच तो सुने हैं, देखे हैं, लेकिन खेलों में पंच-सरपंच को इस बार पहली दफा देखा गया, जोकि अपने-आपमें ऐतिहासिक था। इस पहले ‘तिरंगा रूमाल छू’ लीग की शासन प्रणाली पूरी तरह इनके हाथ में सुरक्षित थी। मैदान पर डटे पंच खेल-खिलाड़ियों पर नियंत्रण रखे हुए थे। उनके द्वारा व्हिसल ब्लोर्इंग की जाती, जो दो खिलाड़ियों को रूमाल को उठाने का आमंत्रण था। उनके प्वार्इंट्स नोट किए जाते और फाउल इत्यादि का निर्णय किया जाता। पूरे ग्राउंड में दो मुख्य पंच और दो उनके सहायक पंच नियुक्त थे, जिन्होंने हर मैच को त्रुटिमुक्त करवाने में अपना पूरा सहयोग दिया। वहीं इन सबके अलावा इस मैच में सरपंच का पद भी नियुक्त था, जिसकी सीट पर स्वयं पूज्य गुरु जी मौजूद थे। खेल सरपंच इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान हर मैच में बड़ी बारीकी से निगाहें जमाए रहे।

खिलाड़ियों की मशक्कत पर तो उनका पूरा ध्यान होता ही, वहीं पंचों और उनके निर्णयों पर भी उनकी पूरी नजर टिकी रहती कि कहीं कुछ उनके द्वारा भूल-चूक तो नहीं की जा रही। क्योंकि वो सब इस प्रकार के नियमों से पहली बार रूबरू हो रहे थे जबकि पूज्य गुरु जी ने तो सब रूल व नियम स्वयं बनाए हैं।

इसलिए पंच भले ही कोई भूल कर बैठते, मगर खेल सरपंच उसे तत्काल ही सुधार देते। यही कारण था कि जब पंच किसी प्वार्इंट का निर्णय करने में असमर्थ दिखते, तो उनके लिए फिर खेल सरपंच ही आखिरी उम्मीद होती। खेल सरपंच की भूमिका निभा रहे पूज्य गुरु जी ने अपने स्टीक निर्णय सुनाए, जिसे खिलाड़ियों ने भी तहेदिल से माना और ऐसे फैसले पर माननीय खेल सरपंच का धन्यवाद किया। निर्णय देने से पहले माननीय खेल सरपंच प्वार्इंट को हर एंगल से जांचते और बार-बार उसको निहारते, ताकि किसी भी दृष्टिकोण से कुछ भी रह न जाए।

कई बार देख लेने के बाद जब अपनी पूरी तसल्ली हो जाती, फिर अपने निर्णय को इशारे के द्वारा जाहिर करते कि प्वार्इंट किसके खाते में आया है। इसमें पूरी पारदर्शिता बरती गई थी। कहीं ऐसा नहीं था कि किसी से कुछ छिपाकर रखा गया हो। माननीय खेल सरपंच का हर निर्णय आम जनभावनाओं के अनुरूप व खिलाड़ियों की अपेक्षा पर सही होता। खेलों में इस प्रकार पंच व सरपंच की भूमिकाओं का यह एकदम नवीनतम व सफल ट्रायल था, जिसे दर्शकों ने अपनी वाहवाही से इसे बेजोड़ बना दिया।

गणमान्य दिखे कायल:-

इस टूर्नामेंट को आम दर्शकों के साथ-साथ देश के गणमान्य व बुद्धिजीवी लोगों ने भी खूब सराहा और इसके मैच को देखकर प्रभावित हुए बिना न रह सके। टूर्नामेंट में हरियाणा के खेल व स्वास्थ्य मंत्री श्री अनिल विज जहां फाईनल से एक दिन पूर्व स्टेडियम में पहुंचे और खेल का रोमांच देखा, वहीं फाईनल (28 अगस्त) में केन्द्रीय खेलमंत्री श्री विजय कुमार गोयल विशेष रूप से पहुंचे थे। उनके साथ हरियाणा के सहकारिता मंत्री श्री मनीष ग्रोवर, गुहला-चीका से विधायक कुलवंत बाजीगर, हरियाणा परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार के पुत्र अनिल पंवार सहित कई गणमान्य लोगों ने इस खेल के नजारे को देखा और अभिभूत हो गए।

सबने पूज्य गुरु जी द्वारा इस खेल के बनाए नियमों-कायदों की जमकर तारीफ की और खेलों को बढ़ावा देने के लिए पूज्य गुरु जी का शुक्रिया अदा किया। पूज्य गुरु जी के अनथक प्रयासों से प्रभावित हुए हरियाणा के खेल व स्वास्थ्यमंत्री महोदय ने डेरा सच्चा सौदा के प्रस्तावित खेल गांव के लिए अपने कोष से 50 लाख की राशी और हरियाणा के सहकारिता मंत्री श्री मनीष ग्रोवर ने 11 लाख का अंशदान देने की घोषणा की, जिसका खेल प्रेमियों व जनसमुदाय द्वारा पुरजोर स्वागत किया गया। यह खेल गांव पूज्य गुरु जी के मार्गदर्शन में बनेगा और इसमें ओलंपिक के लिए खिलाड़ियों का पूरा दल तैयार किया जाएगा, जो कई खेलों में अपना जौहर दिखाएंगे।

पूज्य गुरुजी व गणमान्य लोगों ने मीडिया के सामने अपने विचार व्यक्त किए :

यहां खेल गांव बनाया जाएगा और जो बेस्ट खिलाड़ी होंगे, उन्हें नर्सरी में रखेंगे और अगले चार साल तक सोने को तपिश से गुजारेंगे और खिलाड़ी मैडल अवश्य लेकर आएंगे। सरकार से अच्छे कोच मांगेंगे। जो अच्छे खिलाड़ी निकलेंगे उन्हें सरकार को सौंपेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने आगामी ओलंपिक के लिए टास्क फोर्स का गठन किया है।

इससे पहल आज तक किसी ने खेलों की सुध नहीं ली। प्रधानमंत्री ने यह काम अभी से शुरु कर दिया है, इसके लिए उन्हें बहुत-बहुत साधुवाद है। हमारे देश में टैलेंट की कमी नहीं है। बेटियां खेलों में परचम लहरा रही है। ‘रूमाल छू’ का अगला टूर्नामेंट लड़कियों का होगा। हरियाणा के खेलमंत्री अनिल विज द्वारा खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए ‘खेल गांव’ बनाने के लिए 50 लाख रुपए देने की घोषणा की है, उस बात को बतंगड़ बनाया जा रहा है। यहां ‘खेल गांव’ बनेगा, उसमें वो पैसा लगेगा। उन्होंने रूमाल छू के लिए पैसे नहीं दिए। केंद्र व हरियाणा सरकार खेलों को बढ़ावा देने में लगी हुई है और पूरा विश्वास है कि आने वाले ओलंपिक में देश के खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करेंगे।

-पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां

मैं हरियाणा का हूं और दिल्ली से खो-खो टीम का नेशनल प्लेयर रह चुका हूं। रूमाल छू खेल बहुत पंसद आया। यह खेल हम गलियों में खेला करते थे, गुरु जी को बधाई है, जिन्होंने इस खेल को उठाकर स्टेडियम तक पहुंचा दिया। यह खो-खो, कबड्डी, एथलेक्टिस कई खेलों का समावेश है। डेरा सच्चा सौदा खेलों को बढ़ावा दे रहा है, यहां बहुत बड़ा ‘खेल-गांव’ बन रहा है। हरियाणा सरकार डेरा सच्चा सौदा में खेलों को बढ़ावा देने में सहयोग दे रही है और केंद्र सरकार भी पूरा सहयोग करेगी। मैं यही कामना करता हूं कि यहां से अच्छे खिलाड़ी निकलें। पूज्य गुरुजी ने बहुत अच्छी नियमावली बनाई है। खेल खेल है, इससे भी सरल कई खेल हैं, जो ओलंपिक में शामिल हैं। बेशक ओलंपिक में दो ही मैडल आए, लेकिन 119 खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया था। गुरु जी का विजन और प्रधानमंत्री मोदी जी की जो सोच है, उससे निश्चित ही आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा मैडल आएंगे।

-विजय गोयल, केन्द्रीय खेल मंत्री, भारत सरकार
बहुत ही बेहतरीन खेल है और यह कोम्बो खेल है। यह कबड्डी, खो-खो, पहलवानी आदि कई खेलों को मिलाकर बनाया गया है। इसे देखकर बहुत आनन्द आया। यहां के खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। जिस प्रकार से यहां खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, उम्मीद है कि यहां के खिलाड़ी ओलंपिक में भी गोल्ड मेडल लेकर आएंगे। जैसा मार्गदर्शन, प्रेरणा और आशीर्वाद गुरू जी से मिल रहा है, उससे यहां के खिलाड़ी आसमां की हर ऊंचाई को छू सकतेहैं।

-अनिल विज, स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री, हरियाणा
तिरंगा रूमाल छू खेल वाकई बहुत बड़ा संदेश दे रहा है। गुरु जी के आशीर्वाद से आने वाले समय में और ज्यादा मैडल आएंगे। मैं इस कार्यक्रम के लिए अपनी बेटी व दामाद के साथ प्रस्तावित कार्यक्रम को छोड़कर चला आया हूं, गुरु जी की आवाज मुझे यहां खींच लाई। इस अवसर पर मैं खेल गांव बनाने के लिए अपने कोष से 11 लाख रुपए दे रहा हूं।
– मनीष ग्रोवर, सहकारिता मंत्री, हरियाणा

झलकियां

* ‘तिरंगा रूमाल छू’ लीग के इस पहले आयोजन में 80 लाख इनामी राशि के अलावा कई खिलाड़ियों को बाईक व एक खिलाड़ी को कार भी गिफ्ट में मिली तथा प्रत्येक खिलाड़ी को बोली के द्वारा ईनामी राशि प्राप्त हुई, जो किसी ग्रामीण खेल के लिए गर्व की बात है।

* खिलाड़ियों का सेलेक्शन ट्रायल मैच व स्क्रीनिंग प्रक्रिया के जरिये किया गया।

* इस टूर्नामेंट में डोप टेस्ट का भी प्रावधान था और डोप के 5 दोषी खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता भी दिखाया गया।

* यह आयोजन एक वातानुकूलित इंडोर स्टेडियम में हुआ, जिसमें 2 हजार से 2200 तक दर्शकों की क्षमता थी।

* स्टेडियम को भव्य तरीके से सजाया गया था और इसकी लुक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम से कम न थी।

* मैच को हर एंगल से कवर करने के लिए पूरे स्टेडियम में 10 कैमरे लगाए गए थे, जो प्रत्येक मूवमेंट को अपनी नजरों में कैद कर रहे थे।

* स्टेडियम में चारों तरफ बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीनें लगाई गई थी, जो दर्शकों को हर नजारे से रूबरू करवा रही थीं।

* दुधिया रोशनी में नहाया हुआ स्टेडियम इतना जगमग था कि चींटी भी साफ दिख सके।

*गेम में रेफरी को पंच का नाम दिया गया था, जो एक विशेष बात थी।

* थर्ड अम्पायर के रूप में पूज्य गुरु जी खेल-सरपंच की भूमिका निभा रहे थे और किसी भी संशय पर उनका अंतिम व निर्णायक फैसला होता, जो किसी भी प्रकार से भेदभाव रहित था।

* हर टीम की एक लुभावनी डेस थी। उनका अपना झंडा था, जो परेड व मार्च- पास्ट के समय विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा।

* दर्शकों से खचाखच भरा स्टेडियम हुटिंग से गूंजता रहा। दर्शक अपनी-अपनी टीमों के लिए जोरदार किलकारियां मारते, सीटियां बजाते, जिससे खिलाड़ियों में गजब का जोश भर जाता।

* पूज्य गुरु जी प्रत्येक दिन नई-नई पोशाकों में सजकर आए, जो खेल के दौरान फैशन का एक मनमोहक जलवा था।

* फाईनल वाले दिन पूज्य गुरु जी की तिरंगायुक्त शाही ड्रेस अपना अनुपम जादू बिखेर रही थी। पूज्य गुरु जी की टी-शर्ट पर लहराते डिजाईन में तिरंगा पट्टियां बेहद फब रही थीं।

* पूज्य गुरु जी जब भी अपने निर्णय के द्वारा किसी खिलाड़ी को जीवनदान बख्शने के लिए हरी लाईट जलाते या अपनी उंगली को खड़ी करके फाउल का इशारा करते, तो उनके निर्णय से कायल हुए दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट व हुटिंग से स्टेडियम को गुंजा देते।

* टूर्नामेंट में सबसे अधिक स्कोर एमएसजी तूफानी शेर टीम का रहा, जो 27 अगस्त को उसने राजस्थानी सूरमाओं के विरूद्ध खेलते हुए 89 अंक तक बनाया।

* सबसे कम स्कोर 22 अंक एमएसजी चक दे फट्टे पंजाब के नाम रहा।

* हर मैच में ब्रेक के दौरान पूज्य गुरु जी खिलाड़ियों को उनकी कमियों के बारे में बताते और अच्छा खेलने वाले खिलाड़ी की खूब तारीफ भी करते।

* 23 अगस्त को खेले गए मैच में एमएसजी राजस्थानी सूरमा का अनुज व एमएसजी आस्ट्रेलियन ब्रेव बॉयज का मोनू संयुक्त रूप से मैन आफ द मैच घोषित किए गए और दोनों को अलग-अलग बाईक दी गई।

* खेल आयोजन की ओपनिंग व क्लोजिंग सेरेमनी पर कलाकारों ने दिलकश प्रस्तुतियां पेशकर मन मोह लिया। कलाकारों ने डांस व गीतों के द्वारा अपनी-अपनी कला का बखूबी प्रदर्शन किया और रंगमंच पर दर्शकों को नाचने के लिए मजबूर कर दिया। समापन पर भव्य पेशकारियों से गणमान्य अतिथि भी गद्गद् नजर आए।

* इंडिया के टॉप बॉक्सर विजेंद्र सिंह ने भी ट्वीट के माध्यम से ‘तिरंगा रूमाल छू लीग’ की सराहना की और इसे भारत के पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं पूज्य गुरुजी ने भी विजेंद्र को ट्वीट कर आशीर्वाद दिया और लिखा कि उन जैसे बच्चे जिन्होंने भारत की शान को बढ़ाया है, वे ‘तिरंगा रूमाल छू’ के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ा रहे हैं, बहुत ही सराहनीय है।