… बहुत ताकत है इस मार्इंड में , पूज्य गुरु संत डॉ. एमएसजी के वचनों पर आधारित शिक्षादायक सत्यप्रमाण

पूज्य गुरु जी ने फरमाया
हैं कि दिमाग जैसा आया है, वैसा ही वापिस मत ले जाना, उससे काम लो, नेक भले, अच्छे कामों में उसे लगाओ, दिमाग को जितना ज्यादा इस्तेमाल में लाओगे, जितना ज्यादा इससे काम लोगे, जितना ज्यादा प्रयोग करोगे उतना ही यह आपके लिए बढ़ता जाएगा तथा आपके और ज्यादा काम आता रहेगा।

‘‘हम नहीं चाहते कि आपका दिमाग सौ रुपया मूल्य लगाने के काबिल रह जाए। अर्थात जैसा लाए हो वैसा ही मत ले जाना! इससे काम लो! बहुत ताकत है इस मार्इंड में।

’’ ये वचन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने पिछले दिनों एक रूहानी सत्संग के दौरान लाखों की तादाद में मौजूद साध-संगत में, दिमाग (मार्इंड) की अथाह ताकत के बारे में समझाते हुए फरमाए। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि ‘भाई, मार्इंड में बहुत ताकत है, इससे अच्छे भले विचार लो और इससे काम लो।’

अपने इन पवित्र वचनों के प्रकाश में पूज्य गुरु जी ने एक हंसाने वाली, किंतु बहुत ही शिक्षादायक बात भी सुनाई। आप जी ने फरमाया कि एक सज्जन था। उससे पूछा गया कि अगर दिमाग की कीमत चुकानी हो तो तू कैसे चुकाएगा?

पहला वो, जैसे कोई बहुत बड़ा आॅफिसर है, उसके नीचे बहुत लोग काम करते हैं। सारी कंपनी की जिम्मेदारी उस पर है। अगर मानें, तो सौ रुपये में से उसे कितने रुपये देगा? वो कहता कि मैं पचास रुपए उसको दे दूंगा। फिर उसने पूछा कि अगर कोई वक्ता है, वकील साहब है, सारा दिन बोलने वाला है, उसे कितना देगा? कहता कि उसे मैं पच्चीस रुपये दूंगा।

उसने फिर उससे पूछा कि एक इंसान ऐसा है जो काम तो करता है लेकिन बोलता कम है और इतना ज्यादा काम नहीं करता। वो कहने लगा कि उसको मैं पिच्चतर रुपये (75/-) दे दूंगा। फिर उसने पूछा कि जो काम करता ही नहीं, मजे से सोता है, खाता-पीता है तो उसकी कीमत कितनी लगाएगा? कहता कि उसे मैंं पूरा सौ रुपये दे दूंगा। वो हैरान हो गया।

उसने कहा कि मैंने तुझे कहा था कि दिमाग का मूल्य लगाना है, यह तूने कैसे जवाब दिए? वो सज्जन कहने लगा कि जो सारा दिन बोलता है, जो सारा दिन काम करता है, उन्होंने तो अपना दिमाग खर्च कर लिया, मैं खरीदूंगा तो उनमें अब बचा ही क्या है? और जो सारा दिन सोता है, खाता-पीता है, करता कुछ भी नहीं, उसका दिमाग तो नया का नया पड़ा है।

इसलिए मैं उसका सौ रुपये मूल्य लगाता हूं।
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि तो हम कहते हैं कि हम नहीं चाहते कि आपका दिमाग सौ रुपये मूल्य लगाने के काबिल रह जाए। जैसा लाए हो, वैसा ही वापिस मत ले जाना।

दुनिया में आए हो, इससे काम लो। बहुत ताकत है इस मार्इंड में। इससे अच्छे भले विचार लो और भले काम करो। नेगेटिव काम इंसान को शैतान बना देते हैं, और पॉजिटिव काम इंसान को इंसान से महान बना देता है। यहां तक कि वो (पॉजिटिव) काम इंसान को भगवान से मिला देता है।

इसलिए भाई, अपने दिमाग से अच्छे काम लिया करो, अपने दिमाग का सद्उपयोग करो, उसे अच्छे कामों में खर्च करो।
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि दिमाग जैसा आया है, वैसा ही वापिस मत ले जाना, उससे काम लो। नेक भले, अच्छे कामों में उसे लगाओ।

दिमाग को जितना ज्यादा इस्तेमाल में लाओगे, जितना ज्यादा इससे काम लोगे, जितना ज्यादा प्रयोग करोगे उतना ही यह आपके लिए बढ़ता जाएगा तथा आपके और ज्यादा काम आता रहेगा।

पूज्य गुरु जी ने इसके साथ ही एक उदाहरण भी दिया है (प्रैक्टीकल) कि कोई भी पहेली आप बूझो, एक बार दिमाग लगाओ, हल नहीं मिला। फिर दिमाग लगाओ, हल नहीं मिला, फिर दिमाग लगाओ, फिर दिमाग लगाओ और आखिर में समझ आ जाती है। तो समझ लो कि दिमाग की शक्ति (कार्य करने की क्षमता) थोड़ी बढ़ गई है।

दूसरी तरफ, एक बार दिमाग लगा कर छोड़ दिया कि कौन मत्था मारो। तो आपका दिमाग जितना है, उतना ही रहेगा। तो भाई, आप सुमिरन, भक्ति-इबादत करो तो इससे सोचने की शक्ति बढ़ती है और सोचने की शक्ति बढ़ने से आप दिमाग को ज्यादा इस्तेमाल में लाते हैं और मालिक की कृपा-दृष्टि आप पर ज्यादा बरसती है।

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