मानसून में रखें ख्याल, तो आनन्द होगा दोगुना
बरसात का मौसम भला किसे अच्छा नहीं लगता! लेकिन यह मौसम एक तरफ जहां सुखद आनन्द लेकर आता है, वहीं इस मौसम में कुछ परेशानियां भी होती हैं।

बरसात के दिनों में घर को साफ-सुथरा रखना बेहद जरूरी है, ताकि उमस और सीलन भरे मौसम में भी घर का वातावरण स्वच्छ बना रहे और बरसात में होने वाली बीमारियों से बचा जा सके।

इसलिए झमाझम बारिश का दौर शुरू हो और आपको हर रोज एक नई परेशानी का सामना करना पड़े, इससे पहले ही घर के रख-रखाव से जुड़ी कुछ तैयारियां जरूर कर लें। इन तैयारियों से आप मन को खुशियों से भर देने वाले बरसात के मौसम का मजा खूब अच्छे से उठा सकते हैं।

घर का रख-रखाव:

घर की नींव के नजदीक किसी भी तरह से यदि वहां कीचड़ जमा हो जाता है, तो बाद में यही रिसाव का कारण बन जाता है। इसलिए मानसून से पहले ही इस समस्या को हल कर लेना चाहिए, ताकि बाद में इस तरह की किसी परेशानी से दो-चार न होना पड़े।

बरसात में बाहर से आने के बाद पैरों की हालत काफी बुरी होती है। बाहर की गंदगी घर के अंदर तक न आए इसके लिए अपने घर में छोटे पायदान और आसनों को रख सकते हैं ताकि बाहर से आने वाला पैरों को पोंछ कर घर में घुसे।

घर के अंदर से भी छत की ओर देखें कि छत पर पानी का जमाव या फिर लीकेज तो नहीं हो रही है। समय-समय पर छतों का मुआयना भी करते रहें।

अपार्टमेंट्स की दीवारों और खिड़कियों के आसपास लीकिंग की समस्या को दूर करने के लिए रेन ट्रैक सहित मानसून प्रूफ विंडोज, सिल और ढलान का प्रयोग करें। इससे तेज बारिश के बावजूद पानी घर के अंदर आने के बजाय ढलान से नीचे नाले में चला जाएगा।

घर में ताजी हवा आना बहुत जरुरी है, नहीं तो घर में उमस की गंध आने लगेगी। इसलिए घर में क्रॉस वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। वेंटिलेशन की कमी घर में नमी का एहसास कराती है और कई समस्याओं का खतरा भी रहता है।

मानसून के दौरान घर में पारदर्शी पर्दे लगवाएं, इससे घर में हवा आती रहेगी और नमी का नामोनिशां नहीं रहेगा।
ल्ल दरी और चटाई की रोज सफाई होनी चाहिये। अच्छा होगा कि मानसून के मौसम में उसे अच्छे से संभाल कर रख दें।

घरों की सफाई के दौरान ध्यान रखें कि कहीं दीमक तो नहीं लग रहा! यदि है, तो उसे दूर करने के उपाय करें।

अन्यथा धीरे-धीरे पूरे घर में यह फैल जाएगा। बरसात के दिनों में यह तेजी से फैलता है। यह कई समस्याओं का कारण भी बन सकता है।

वुडेन फ्लोरिंग हो तो ध्यान रखें कि वहां नमी न हो। उसे अच्छी तरह से पॉलिश करवा लें। ऐसा न करने पर लकड़ी के फ्लोर पर नमी फैलने लगती है, जिससे दीमक लगने का खतरा बढ़ जाता है।

सबसे बड़ी मुश्किल जो बरसात में होती है, वह है बदबू। घर में फैली बदबू से बचने के लिए रूम फ्रैशनर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

बिजली उपकरणों की संभाल:

बारिश के दिनों में जेनरेटर में अक्सर समस्या आ जाती है। अगर आपके घर जेनरेटर है, तो उसकी मेनटेनेंस का ध्यान रखें। जेनरेटर के पार्ट्स की जांच-पड़ताल उसे खराब होने से बचाए रखेगा। बीच-बीच में ट्रेंड प्रोफेशनल्स की मदद लेते रहने पर मेनटेनेंस में आसानी होगी।

सभी इलेक्ट्रिक डिवाइसिस को सही केस में रखें ताकि बारिश के पानी से उन्हें किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।

अगर बिजली की लाइन में किसी तरह की समस्या है, तो उसे समय रहते ठीक करवा लें। बारिश के मौसम में शॉर्ट सर्किट की समस्या बढ़ जाती है।

बारिश के मौसम में अकसर बिजली गुल हो जाती है, इस समस्या का सामना करने के लिए इमरजेंसी लाइट, बैटरी से चलने वाले फ्लैश लाइट्स आदि इस मौसम में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

इलेक्ट्रिक अप्लायंसेज की सुरक्षा बेहद जरूरी है। इसके लिए सभी ज्वाइंट्स को अच्छी तरह से कवर करवा लें। घर में हमेशा अच्छी क्वालिटी के इलेक्ट्रिक आइटम्स इस्तेमाल करें।

पौधों की देखभाल:

यदि आपके पास इंडोर प्लांट्स हैं तो उन्हें कुछ वक्त के लिए बारिश में रख दें, आपके इंडोर प्लांट्स न सिर्फ फ्रेश हो जाएंगे बल्कि वो अपने साथ घर में भी फ्रेशनेस लाएंगे।

मानसून का मौसम हरियाली फैलाने और आसपास के माहौल को हरा-भरा करने के लिए मुफीद है। आप इस मौसम में किचन गार्डेन भी लगा सकते हैं। इससे वक्त भी आसानी से गुजरेगा और हरियाली भी आपके घर आएगी।

स्वास्थ्य की संभाल:

बरसात में बच्चों को नहाने का बहुत शौक होता है। नहाने के बाद बच्चों का शरीर तौलिये से अच्छे से पौंछ दे व उन्हें गर्म चीजें खाने को दें।

बरसात के मौसम में सर्दी, खांसी और जुकाम तो आम बात है। बारिश में भीगने के बाद अगर बुखार आ जाये तो पानी में पांच-छ: तुलसी की पत्तियां डालकर चाय-दूध पीना लाभप्रद होता है। तुलसी की पत्तियों को पीसकर भी सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा काली मिर्च से बनी चाय भी लाभदायक होती है।

बरसात में चर्म रोगों का भी बोलबाला होता है। इसके लिए सप्ताह में कम से कम चार दिन नहाने का साबुन इस्तेमाल करेंं। नहाने के पानी में डेटॉल की कुछ बूंदें डालें या नीम की पत्तियों को उबाल कर डालें। मेंहदी का इस्तेमाल भी चर्मरोगों से बचाव करता है।

बरसात में खाने-पीने की चीजों की भी विशेष देखभाल करनी पड़ती है। खाने की वस्तुओं जैसे-बिस्किट, मिक्सचर, पापड़ इत्यादि को पोलिथिन की थैली में पैक करके रखना चाहिए। रसोईघर की वस्तुओं को भी बंद डिब्बों में रखना चाहिए।  – आर. सिंगला