कुछ आदतें जिनसे दूरी अच्छी

आदतें तो इंसान के जीवन में रसी-बसी हैं, पर कुछ आदतें इंसान को उच्च श्रेणी में ला खड़ा करती हैं और कुछ आदतें ऐसी होती हैं जो दूसरों को नुकसान देती हैं या चिड़चिड़ा भी बना देती हैं। आइए देखें, आपमें कैसी आदतें हैं!

यदि आपमें भी कुछ ऐसी आदतें हैं तो इनसे तौबा करना ही अच्छा है:-

■ अपना काम टालते रहना अच्छी आदत नहीं है। जब तक आप अपना काम पूरा नहीं करेंगे, तब तक आप एक अजीब से तनाव में जीते रहेंगे। अच्छा है काम टालने की आदत को बदल डालिए और तनावमुक्त जीवन जिएं।

■ कई लोगों में यह आदत होती है कि मौके बेमौके दूसरों की टांग खींचते रहते हैं। कभी-कभी इस आदत से अच्छी दोस्ती से हाथ धोना पड़ सकता है और कभी मौका लगने पर दूसरा भी आपकी टांग खींच सकता है।

■ दूसरों की बातों पर जल्द ही विश्वास न करें, न ही उनकी बातों में आकर बिना विचार किए कुछ फैसला कर बैठें। सलाह लें पर उस पर विचार अवश्य करें।

■ चापलूसी की आदत भी बदल डालें। क्योंकि पीठ पीछे चापलूसी करने वालों का मजाक उड़ता है।

■ अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए किसी से नजदीकी बढ़ाने का प्रयास न करें।

■ जब भी किसी से बोलें, सोच समझ कर बोलें, चाहे आपसे दूसरा छोटा हो या बड़ा।

■ समय बलवान है, इसके महत्त्व को जानें और समय को बर्बाद न कर अपने उद्देश्य को पाने का प्रयास करें।

■ यदि आप महिला हैं तो महिला होने का लाभ न उठाएं। कभी-कभी यह लाभ महंगा भी पड़ सकता है।

■ सबसे मित्रवत व्यवहार बनाए रखें। किसी से व्यवहार में खींचातानी मत रखें। मधुर संबंध रिश्तों को सजीव व जीवित रखते हैं।

■ समय पर दफ्तर जाएं। बिना किसी विशेष आवश्यकता के लघु अवकाश न लें। जब वास्तव में जरूरत हो तो अपने बास को समय पर सूचित करें।

■ आॅफिस में काम को हंसी खुशी से निबटाएं। कुछ समझ नहीं आ रहा तो नर्वस न हो कर अपने सीनियर से मदद मांगें, काम सीखने में कोई बुराई नहीं।

■ दूसरों की निंदा करते हुए समय बर्बाद न करें। परनिंदा कभी-कभी झगड़े का कारण भी बन सकती है।

■ काम करते समय एकाग्रचित हो कर काम करें, फालतू में इधर-उधर ध्यान को न भटकाएं।

■ अपने पर जरूरत से ज्यादा भरोसा न करें। यह सच है कि कभी-कभी ओवरकान्फीडेंस नुक्सान भी पहुंचाता है।

■ आगे बढ़ने के लिए कभी झूठ का सहारा न लें। झूठ पकड़े जाने पर शर्मिन्दगी उठानी पड़ सकती है।

■ अपने कामों के लिए दूसरों पर निर्भर न हों, न ही दूसरों से अधिक आशा रखें। उम्मीद पूरी न होने पर निराशा हाथ लगती है। जितना स्वयं कर सकें, उतना ही करें।

■ दूसरों से बात करते समय संकोच न करें। अपनी बात प्यारपूर्वक दूसरों को समझाएं। उन पर अपना आदेश या इच्छा न लादें।  – सारिका