बच्चे के दोस्तों पर रखें विशेष ध्यान बच्चे के दोस्तों पर रखें विशेष ध्यान कहते हैं कि जैसे लोगों के साथ हम रहते हैं, हमारी सोच भी वैसी ही हो जाती है। कहा भी गया है कि ‘संगत जैसी बैठिए, वैसी बुद्धि होए’। हम अपने बचपन पर गौर करें तो याद आएगा कि हमारे अभिभावक हमारे लिए कितना परेशान रहते थे, खासकर के हमारे दोस्तों को लेकर। उनको ऐसा लगता था कि अगर हमारी दोस्ती समझदार और पढ़ाकू से होगी, तो हम भी अव्वल आएंगे। हमारा भविष्य उज्जवल होगा।

आज वो समस्या हमारी भी हो चुकी है। अब जब अपने बच्चे हैं तो हमें भी कई बार उनके दोस्त अच्छे नहीं लगते हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या वाकई, जिसे हम नहीं पसंद करते हैं, वो बच्चा बुरा है या हमने ही गलतफहमी पाल रखी है! हम यहां बात कर रहे हैं कि अगर बच्चे का दोस्त हमें नहीं पसंद है, तो हम क्या करें? बच्चों का मन इतना कोमल होता है कि उनको मना करने पर वो उसे अन्यथा ले सकते हैं! इसलिए बेहतर यह है कि इसका कोई आसान हल निकाला जाए, जिससे बच्चे को भी समस्या न हो और आप भी सुकून से रह सकें।

ईमानदारी दिखाएं:

एक बार गौर करें कि आपको उसका दोस्त आखिर क्यों नही पसंद है? कई बार जिन बच्चों की आवाज तेज होती है या जो विनम्र नहीं होते हैं, हम उसे नापसंद कर देते हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि बच्चा किसी से भी दोस्ती कर सकता है, फिर चाहे वो आपको पसंद हो या न हो। इसलिए उसे ऐसे दोस्तों से दूर रखने के लिए पूरी जानकारी जरूर जुटा लेनी चाहिए, जिनमें आपको कोई बुरी आदतें नजर आई हैं और इसके बाद ही अपने बच्चों को बताएं कि उसमें ये-ये आदतें पसंद नहीं हैं।

एकदम से मना कतई ना करें:

बच्चों को कोई बात अगर सख्ती से मना की जाती है, तब वो उसे जरूर करते हैं। इस बात का पूरा ख्याल रखें कि उसे मजबूर कतई न करें। इसके बजाय उसके साथ बैठें और उसे समझाएं कि दोस्त की किन बुरी आदतों का उसपर गलत असर पडेगा। उसकी बुरी आदतें कैसे उसे नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके साथ ये भी पता करें कि आपका बच्चा अपने दोस्त की किन चीजों से आकर्षित होता है। वाकई में उसका दोस्त बुरा है, तो कुछ ऐसी तरकीब निकालें, जो उसे पसंद आए और जहां वह व्यस्त रह सकता है। और फिर उसे नए दोस्त बनाने के लिए प्रेरित करें।

कुछ शर्तें रखें:

दोस्त से अगर बच्चा दूरी नहीं बना पा रहा है, तो आप उसके आगे कुछ शर्तें रखें। ये तरीका आपकी मुश्किल को कम कर सकता है। एक आसान-सी शर्त यह भी रखें कि वह अपने दोस्त के साथ घर पर खेले। इससे दोनों आपकी देखरेख में रहेंगे।

गलतफहमी से बाहर निकलें:

हो सकता है कि उसके दोस्त के लिए जो धारणा आपने बना ली है, हो सकता है कि वो सिर्फ आपका शक या डर हो। इसको जितनी जल्दी हो सके दूर करें। इसलिए उस बच्चे को अच्छे से समझने के लिए उसे घर बुलाएं, उससे बातें करें उसके साथ थोड़ा वक्त बिताएं।

इससे आप सही और गलत का आसानी से निर्णय ले पाएंगे और उसी के आधार पर ही आप अपने बच्चे को आसानी से समझा भी पाएंगे। लेकिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात ये है कि प्यार और दुलार से ही बच्चे को समझाया जा सकता है, अर्थात् उसे बुरी चीजों और बुरी संगत से दूर तो रखना ही पड़ेगा।- किशोर वर्मा