शरीर का पोषण करती है, मूंगफली : सर्दियां आ गयीं तो मूंगफली खाने का मजा बढ़ गया।

परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर मूंगफली खाएं। इसे ‘गरीबों का बादाम’ कहा जाता है। मूंगफली हमारे शरीर का पोषण करती है।

इतना जरुर ध्यान रखें कि ज्यादा मूंगफली खाने से नुकसान भी हो सकता है। मुट्ठी भर भुनी मूंगफलियां निश्चय ही पोषक तत्वों की दृष्टि से लाभकारी हैं। मूंगफली में प्रोटीन, केलोरी और के, ई, बी विटामिन भरपूर होते हैं। ये अच्छा पोषण प्रदान करती हैं।

मूंगफली में प्रोटीन, चिकनाई और शर्करा पाई जाती है। मूंगफली की भुनी हुई एक किलोग्राम गिरी में दो गैलन दूध के बराबर ऊर्जा होती है। इसका प्रोटीन दूध से मिलता-जुलता है, चिकनाई घी से मिलती है। मूंगफली के खाने से दूध, बादाम और घी की पूर्ति हो जाती है।

मूंगफली शरीर में गर्मी पैदा करती है, इसलिए सर्दी के मौसम में ही खाना ज्यादा लाभदायक है। यह तर खांसी में उपयोगी है। मेहदे और फेफड़े को बल देती है। थोड़ी मात्रा में नित्य मूंगफली खाने से मोटापा बढ़ता है।

इसे भोजन के साथ, जैसे सब्जी, खीर, खिचड़ी आदि में डालकर नित्य खाना चाहिए। मूंगफली में तेल का अंश होने से यह वायु की बीमारियों को नष्ट करती है। यह पाचनशक्ति को बढ़ाती है और रूचिकर होती है, लेकिन गर्म-प्रकृति के व्यक्तियों के लिए हानिकारक भी है। मूंगफली ज्यादा खाने से पित्त विकार भी बढ़ता है।

यक्ष्मा (टीबी):-

मूंगफली में रसायन आर्जिनाइन नामक एमीनो अम्ल बहुतायत में पाया जाता है जो यक्ष्मा रोग को दूर करने में सफल हो सकता है। यह शरीर में नाइट्रिक-आॅक्साइड का स्तर बढ़ाने में सहायक हो सकता है। नाइट्रिक और आॅक्साइड शरीर की रोगप्रतिरोधक प्रणाली को चुस्त करता है।

मूंगफली में वसा जैसे अन्य पौष्टिक तत्व भी होते हैं, जो कि रोगियों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। रोगियों को चार सप्ताह तक अन्य दवाओं के साथ आर्जिनाइन वाले कैप्सूल दिए गए। प्रयोग में पाया गया है कि जिन रोगियों को आर्जिनाइन की खुराक दी गई उन पर उपचार का ज्यादा लाभ दिखाई दिया।

तेज खांसी जैसे लक्षणों में जल्दी सुधार देखा गया। थूक की जांच में भी टीबी के जीवाणुओं के स्तर में कमी देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्जिनाइन थेरेपी की मदद से टीबी की चिकित्सा के समय में कमी लाई जा सकती है। विशेषज्ञों ने कहा है कि जहां आर्जिनाइन औषधि के रूप में सरलता से या सस्ते में उपलब्ध नहीं हो, वहां मूंगफली से इसका काम लिया जा सकता है। टी.बी. के रोगियों को नित्य मूंगफली खानी चाहिए।

गर्भावस्था:-

गर्भकाल में स्त्रियों को साठ ग्राम मूंगफली नित्य खाने से गर्भस्थ शिशु की प्रगति में लाभ होता है।
सेंकी हुई मूंगफली पीसकर पाउडर बना लें। गर्भावस्था में एक गिलास गर्म दूध में तीन चम्मच पाउडर डालकर नित्य एक बार पीने से स्वस्थ शिशु का जन्म होता है अथवा सेंकी हुई मूंगफली खाती जायें और दो-दो घूंट दूध पीयें। इस विधि से भी समान लाभ होगा।

दूधवृद्धि:-

नित्य कच्ची मूंगफली खाने से दूध पिलाने वाली माताओं का दूध बढ़ता है।
नई सिकी हुई मूंगफली नियमित खाते रहने से भी माताओं के दूध में वृद्धि होती है।
त्वचा की कोमलता – जाड़े के दिनों में नई सिकी हुई मूंगफली खाते रहने से त्वचा कोमल रहती है और हाथ-पैर नहीं फटते।

खुश्की, सूखापन:-

सर्दियों में त्वचा में सूखापन आ जाता है। जरा सा मूंगफली का तेल, दूध और गुलाबजल मिलाकर मालिश करें और बीस मिनट बाद स्रान कर लें। इससे त्वचा का सूखापन ठीक हो जायेगा।

होंठ-

नहाने से पहले हथेली में चौथाई चम्मच मूंगफली का तेल लेकर अंगुली से हथेली में रगड़ें और फिर होंठों पर इस तेल की मालिश करें, होंठों के लिए यह लाभप्रद है।

मोटापा घटाना:-

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खाना खाने से कुछ समय पूर्व थोड़ी-सी भुनी हुई मूंगफली बिना चीनी की चाय या कॉफी के साथ ली जाए, तो भूख जल्दी शांत हो जाती है और व्यक्ति कम भोजन करता है। इस प्रकार शरीर का वजन धीरे-धीरे कम होने लगता है।

हृदय –

मूंगफली में विटामिन ‘बी’ भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसे शरीर के लिए आवश्यक कैलोरीज का भण्डार कहा जाता है। इसके उपरान्त भी मूंगफली के प्रयोग में यह विशेषता है कि इसमें कोलेस्टाल नामक पदार्थ नहीं होता। इसमें मोनो अनसेचुरेटेड फैटी एसिड होता है जो हृदय रोग के खतरे को कम करता है। मूंगफली के रिफाइण्ड तेल के डिब्बे पर भी छपा रहता है कि यह हृदय रोग का खतरा कम करता है।

यदि कम मात्रा में मूंगफली खायें तो दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन अधिक खाने से हानि हो सकती है। हृदय के रोगियों को मूंगफली कम से कम खानी चाहिये। मूंगफली दिल के लिए हानिकारक हो सकती है। शिकागो विश्वविद्यालय में अमेरिका के डॉ. ड्रेगा वेसिलियनोविच और उनके सहयोगी शोधकर्ताओं ने यह बताया है कि दिल को मूंगफली से खतरा है, इससे धमनियों की आन्तरिक दीवार पर वसा जमा हो जाती है जिससे रक्तप्रवाह में अवरोध उत्पन्न हो सकता है। यह मत डां. ड्रेगा ने बन्दरों को सुबह शाम भरपेट मूंगफली खिलाकर परीक्षण के आधार पर व्यक्त किया।

मूंगफली का तेल पौष्टिक और स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है। यह सरलता से पच जाता है। इसमें प्रोटीन इतनी पर्याप्त मात्रा में होता है जिससे कि प्रोटीन के लिए कोई अन्य चीज लेने की आवश्यकता ही नहीं होती है।
हाथ, पैर और जोड़ों के दर्द में भी मूंगफलीली का तेल लाभ पहुंचाता है।

मूंगफली के तेल से शरीर की मालिश करने पर स्रायु मजबूत होते हैं तथा दर्द में आराम मिलता है।
मूंगफली के तेल को गुनगुना करके मालिश करने से दाद, खाज, खुजली आदि त्वचा रोग ठीक होते हैं।
-(हिफी)

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