फलों की रानी लीची
‘आम’ को ‘फलों का राजा’ कहा जाता है, तो ‘लीची’ को ‘फलों की रानी’ माना गया है। लीची, ऐसा फल है, जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। ऊपर लाल रंग का खुरदरा छिलका छीलकर इसके अंदर का सफेद मीठा गुद्दा खाने का अपना एक अलग ही मजा है।

खाने में स्वादिष्ट व स्वास्थ्य गुणों से भरपूर लीची विटामिन सी और पोटेशियम का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। इसके अंदर पानी की मात्रा भी काफी होती है।

लीची को गरमी में खाने से शरीर में पानी के अनुपात को संतुलित रखते हुए ठंडक भी पहुंचाती है। दस लीचियों से हमें लगभग 65 कैलोरी मिलती है।

ज्यादा समय न टिक पाने की वजह से इसे एक बार पकने के बाद जल्दी खा लेना चाहिए। इसका स्वाद थोड़ा गुलाब और अंगूर से मिलता-जुलता है, पर अनोखा जरूर है।

आज कल यह बंद डिब्बों में भी मिलने लगी है। लीची को बतौर फल ही नहीं खाया जाता, इसका जूस और शेक भी बहुत पसंद किए जाते हैं। जैम, जैली, मार्मलेड, सलाद और व्यंजनों की गार्निशिंग के लिए भी लीची का इस्तेमाल किया जाता है।

रोजाना लीची खाने से चेहरे पर निखार आता है और बढ़ती उम्र के लक्षण कम नजर आते हैं। इसके अलावा ये फल शारीरिक विकास को भी प्रोत्साहित करने का काम करता है। हालांकि लीची खाते समय ध्यान रखें कि इसे बहुत अधिक मात्रा में खाना नुकसानदेह हो सकता है।

बहुत अधिक लीची खाने से खुजली, सूजन और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
कुछ वैज्ञानिकों ने तो लीची को ‘सुपर फल’ का दर्जा भी दिया है। अध्ययनों से साबित हुआ है कि विटामिन सी, फ्लेवोनॉयड, क्यूरसीटीन जैसे तत्वों से भरपूर लीची में कैंसर, खासतौर पर स्तन कैंसर से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से हमारे शरीर में कैंसर के सेल्स ज्यादा बढ़ नहीं पाते।

लीची एक अच्छा एंटीआॅक्सीडेंट भी है। इसमें मौजूद विटामिन सी हमारे शरीर में रक्त-कोशिकाओं के निर्माण और लोहे के अवशोषण में भी मदद करता है, जो एक प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए रखने के लिए जरूरी है। रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पाचन-प्रक्रिया में सहायक लीची में बीटा कैरोटीन, राइबोफ्लेबिन, नियासिन और फोलेट जैसे विटामिन बी काफी मात्रा में पाया जाता है।

लीची उत्पादन:

लीची का अधिक मात्रा में उत्पादन दक्षिण चीन में होता है, लेकिन मुजफ्फरपुर (बिहार) पूरे विश्व में लीची को लेकर मशहूर है। यहां की लीची देश-दुनिया के लगभग सभी भागों में जाती है। लीची की खेती बिहार के मुजफ्फरपुर के साथ-साथ देहरादून, उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र, झारखंड, हिमाचल तथा बंगाल में भी की जाती है। लेकिन वहां विशिष्ट जलवायु नहीं होने के कारण इसके फल छोटे होते हैं। गुणवत्ता के आधार पर अभी तक मुजफ्फरपुर की लीची का स्थान सबसे प्रमुख है।

लीची में पौष्टिक तत्व:

लीची में 41 प्रतिशत पानी, 6 से 8 प्रतिशत शर्करा, 0.64 प्रतिशत अम्लता, 0.2 प्रतिशत साइट्रिक अम्ल, 0.4 प्रतिशत रेशे व लौह तत्व, वसा, कैल्शियम, फास्फोरस, जैसे महत्वपूर्ण खनिज तत्वों की भी कुछ मात्रा विद्यमान होती है। सौ ग्राम लीची में 40 से 50 मिलीग्राम विटामिन सी की मात्रा समाहित होती हैं। सौ ग्राम लीची का सेवन करने से मनुष्य को 65 प्रतिशत कैलोरी की प्राप्ति शारीरिक ऊर्जा के रूप में होती हैं.

लीची खाने के फायदे:

ब्लडप्रेशर से बचाए: लीची में मौजूद पोटैशियम और तांबा दिल की बीमारियों से बचाव करते हैं। यह हृदय की धड़कन की अनियमितता अथवा अस्थिरता और बीपी को नियंत्रित रखता है, जिससे हार्ट-अटैक का जोखिम कम हो जाता है।

बच्चों के विकास में सहायक:

लीची में पाए जाने वाले कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम आदि खनिज तत्व बच्चों के शारीरिक गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये मिनरल्स हड्डियों में विकार पैदा करने वाली बीमारी ‘आॅस्टियोपोरोसिस’ को रोकने में मदद करते हैं।

कैंसर से रक्षा करती है:

अध्ययनों से साबित हुआ है कि विटामिन सी से भरपूर लीची में कैंसर (खासतौर पर स्तन कैंसर) से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से हमारे शरीर में कैंसर के सेल्स ज्यादा बढ़ नहीं पाते। लीची एक अच्छा एंटीआॅक्सीडेंट भी है। इसमें मौजूद विटामिन सी हमारे शरीर में रक्त कोशिकाओं के निर्माण और लोहे के अवशोषण में भी मदद करता है।

पाचन प्रक्रिया में सहायक:

लीची में बीटा कैरोटीन, राइबोफ्लेबिन, नियासिन और फोलेट जैसे विटामिन बी काफी मात्रा में पाए जाते हैं। यह विटामिन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पाचन-प्रक्रिया के लिए जरूरी है। फोलेट हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखता है।

वजन कम करने में सहायक:

इसमें फाइबर काफी मात्र में मिलता है, जो मोटापा कम करने का अच्छा साधन है। फाइबर हमारे भोजन को पचाने में सहायक होता है। यह वायरस और संक्रामक रोगों से लड़ने के लिए शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

ऊर्जा का प्रमुख स्त्रोत:

लीची ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। थकान और कमजोरी महसूस करने वालों के लिए लीची बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद नियासिन हमारे शरीर में ऊर्जा के लिए आवश्यक स्टेरॉयड हार्मोन और हीमोग्लोबिन का निर्माण करता है, इसलिए लीची खाने से आप ऊजार्वान महसूस करने लगते हैं।

पानी का स्तर बनाए रखती है:

लीची का रस एक पौष्टिक तरल है। यह गर्मी से संबंधित समस्याओं को दूर करता है और शरीर को ठंडक पहुंचाता है। लीची हमारे शरीर में संतुलित अनुपात में पानी की आपूर्ति करती है और निर्जलीकरण की समस्या को दूर करती है।

संक्रमण से बचाए:

लीची खांसी-जुकाम, बुखार और गले के संक्रमण को फैलने से रोकती है। गंभीर सूखी खांसी के लिए तो लीची रामबाण है। आॅलिगनॉल नामक रसायन की मौजूदगी के कारण लीची एन्फ्लूएंजा के वायरस से बचाव करती है।

त्वचा में निखार लाए:

लीची में सूरज की अल्ट्रावॉयलेट यू.वी. किरणों में हमारी त्वचा और शरीर का बचाव करने की खासियत होती है। लीची के नियमित सेवन से तैलीय त्वचा को पोषण मिलता है और चेहरे पर पड़ने वाले दाग-धब्बों में कमी आ जाती है।

बीज और छिलका भी फायदेमंद:

लीची के बीज का इस्तेमाल औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जाता है। पाचन संबंधी विकारों को दूर करने के लिए लीची के बीज के पाउडर की चाय पीना फायदेमंद है, ऐसी चाय पीने से तंत्रिका तंत्र में होने वाले दर्द में भी राहत मिलती है। पेट के कीड़े मारने के लिए शहद के साथ यह पाउडर मिला कर खाया जाता है। किसी भी अंग में सूजन कम करने के लिए लीची के बीज के पाउडर का लेप लगाने से आराम मिलता है।

सावधानी:-

लीची का सेवन सीमित मात्र में ही करें, अन्यथा यह नुकसानदेह भी साबित हो सकती है। 10-11 से ज्यादा लीची न खाएं। इससे ज्यादा लीची का सेवन नकसीर और सिर दर्द जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

यह शरीर में खुजली, जीभ तथा होंठों में सूजन और सांस लेने में कठिनाई भी पैदा कर सकता है।

बच्चों को 2-4 लीची ही देनी चाहिए। खाली पेट लीची नहीं खानी चाहिए। – विक्रम त्यागी