14 मई हैप्पी मदर्स डे मां तुझे प्रणाम
संतों ने मां को भगवान का दूसरा रूप बताया है। मां की महत्ता के बारे में पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने फरमाया है कि ‘‘जरा सोचिए, आप यहां बैठे हैं, उसका बहुत बड़ा कारण मां भी है। एक जगह हम गए।

वहां पर टीनेज बच्चों से हम एक हॉल में मिले। चर्चा करी, तो उन्होंने शिकायत लगानी शुरू कर दी कि मेरे मां, पापा मुझे ये कहते है, वो कहते हैं, हमें बात-बात पे रोकते-टोकते हैं…। हम उनकी बातें सुनते रहे, वो बोलते रहे।

लास्ट में हमने कहा कि बच्चो, एक बात हमारी सुनो और जवाब दो! हमने कहा, हम आपको तीन-चार किलो का पत्थर (बाट) देते हैं और इस पत्थर को अपने पेट पर बांध लो और बांधे रखो। सोते टाईम भी नहीं उतारना, टॉयलेट जाते हो, खाना खाते हो, कभी नहीं उतारना।

तो वो बोले, गुरु जी, हम नहीं ये कर सकते। हमने पूछा, क्यों? कहते, इतना वजन लेकर क्यों घूमें? तो हम बोले, आपकी मां ने नौ महीने तक इतना वजन ढोया है आपका और उसकी दो बातें भी बुरी लगती हैं और आप तीन किलो का बाट लेकर तीन दिन नहीं चल सकते! तो क्या उसका हक नहीं कि जिसने नौ महीने आपको गर्भ में रखा, दो-चार बातें आपको कह दे! तो सब बच्चे रोने लगे, गुरु जी, तौबा आगे से मां-बाप की बात सुना करेंगे।’’

मां क्या है? मां तो बस मां है। चन्द्र सी शीतल और गंगा सी पावन, यदि कोई है तो बस ‘मां’ है। सुमेरु-सी अडिग, हिम सम उज्जवल, दया, करुणा, पे्रम का सागर यदि कोई है तो बस मां है। मां परिवार का ‘मेरूदंड’ है। जिस तरह शरीर का आकार, गठन, उसकी दृढता मेरूदंड (रीढ की हड्डी) पर निर्भर करती है, उसी तरह किसी भी परिवार की आर्थिक, सामाजिक, मानसिक तथा पारिवारिक स्थिति उस घर की बुजुर्ग नारी (मां) पर निर्भर करती है।

धरती पर मां शब्द नहीं होता तो करुणा, वात्सल्य, त्याग, बलिदान ये शब्द अधूरे लगते। मां और जननी, ये दोनों शब्द एक-दूसरे के पूरक हैं। मां यानी ‘वात्सल्य का दरिया’। जिन बच्चों को अपने माता-पिता का आशीर्वाद प्राप्त होता है, उन पर प्रभु अवश्य ही कृपा करते हैं, क्योंकि उनका आशीष मात्र दिखावा न होकर हृदय से निकला हुआ ‘अमृत’ होता है!

भारत सहित बहुत से देशों में मदर्स-डे हर वर्ष मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में मां का दर्जा सर्वोपरि है। माता के ऋण से कभी उऋण नहीं हुआ जा सकता। ‘प्रात: काल उठि कर रघुराई, प्रथम मातु-पितु शीश नवाई’ – भारतीय संस्कृति की यह परंपरा आज भी सभ्य घरानों में है। ‘मातृ देवो भव’, अर्थात् देवता की भांति मां पूजनीय है।

शास्त्रों को मां जननी, धरती, गाय, अन्न, मां देवी, बड़ी बहन-भाभी, आया (पालन करने वाली) इत्यादि कहा गया है, लेकिन फिर भी मां की ममता, उसके वात्सल्य की बराबरी मां का कोई वैकल्पिक नाम नहीं कर सकता, इसलिए मां का कोई विकल्प नहीं है, यह कहने में कोई संकोच नहीं! वेदों में तो मां को सुंदर शब्दों में निरुपित किया है,

कहा है – ‘मां, तुम जननी हो! त्यागमयी वात्सल्य की मूरत हो! श्रद्धा व पे्रम से पूजनीय हो! सहनशीला हो तथा हर वक्त वन्दनीय हो!’

‘पृथ्वी से भारी मां होती है’, यह उत्तर था युधिष्ठिर का, जब यक्ष ने यह प्रश्न पूछा कि ‘पृथ्वी से भारी क्या है?’ सचमुच में मां अपने बच्चों को जितना पे्रम देती है और उनका हित चाहती है, उतना अन्य कोई नहीं।

सागर से भी विशाल है मां का करूणामयी, वात्सल्य स्वरूप हृदय। मां को ‘सर्व तीर्थमयी’ भी कहा गया है, क्योंकि सारे तीर्थों का भ्रमण करने का फल मात्र मां की सेवा-वंदना में है। ‘सहस्त्रं तु पितृन्माता गौरवेणातिरिच्यते’ (मनु स्मृति 2/145) अर्थात् माता का दर्जा पिता से हजार गुणा बड़ा माना गया है।

एक समय की घटना है। एक शिष्य अपने सद्गुरु के सत्संग में जा रहा था। रास्ते में उसे स्वप्न आया कि तेरी बूढ़ी मां जो बीमार है, उसकी जाकर सेवा कर, इससे तेरे जीवन का कल्याण होगा।

वह शिष्य रास्ते से ही घर वापिस लौट आया और मां की खूब सेवा की। जिसके प्रताप से उसे घर बैठे ही प्रभु के साक्षात् दर्शन हुए और उसका जीवन सफल हुआ।

कहा है – ‘चाहे लाख करो तुम पूज, और तीर्थ करो हजार! यदि मां का दिल दुखाया, तो सब कुछ है बेकार!’ जीव की उत्पति के समय जो कष्ट माता सहती है, उसका ऋण सौ वर्षों की सेवा से भी नहीं चुकाया जा सकता। अगिनत कष्ट सहकर जिसने हमें जीवन दिया, ऐसी प्यारी मां का दिल कभी दुखाना तो दूर, ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता।

जब धरती पर प्रथम स्वास लिया, तब माता साथ में थी। जन्म और जीवन के मध्य में है मां। मां रचती है, सृजन करती है इसलिए उसे सृजक भी कहा। मां वात्सल्य का विग्रह है! वह ममता का मर्म है! मां गूंगे की मिठास जैसी अपरिभाषित, अव्यक्त अनुभूति है! मां से ही महापुरुषों ने, वीर-योद्धाओं ने, दानवीरों ने जन्म लिया और लोक कल्याण हेतु आजन्म सुकृत्य करने का बीड़ा उठाया जिसके पीछे मां की पे्ररणा और संस्कार ही तो थे उनका संबल! धन्य है मां! जिसके बारे में जितना लिखा जाये उतना ही कम है।

वर्तमान में (आधुनिक युग) हालांकि चीजें बहुत बदल गई हैं, लोग थोड़े मॉडर्न हो गए हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि बच्चों के दिलों में मां के प्रति किसी प्रकार की कोई कमी आई हैं। इतना जरूर है कि मॉडर्न लाईफ के अनुसार मां-बच्चे का प्रेम भी थोड़ा मॉडर्न हो गया है। तभी तो, मदर्स डे के अवसर पर बच्चे अपनी मां को खुश करने के लिए नई-नई आधुनिक चीजें भेंट करना पसंद करते हैं।

तो चलिए, हम आपको बताते हैं कि इस मदर्स-डे पर आप अपनी मां को किस प्रकार के गिफ्ट दे सकते हैं:-

मदर लॉकेट व ब्रेसलेट:

इस मदर्स डे के मौके पर आप अपनी मां को लॉकेट व ब्रेसलेट गिफ्ट कर सकते हैं। यह स्पेशल लॉकेट व ब्रेसलेट है, जिन पर ‘मॉम’ लिखा होता है। इसके अलावा, आप अपनी मां की फोटो भी लॉकेट में लगाकर उन्हें गिफ्ट कर सकते हैं।

क्रिएटिव गिफ्ट:

आपके पास अपनी मां की फोटो है, तो आप उससे कई तरह के क्रिएटिव गिफ्ट डिजाइन कर सकते हैं। आप अपनी ममी और अपनी फोटो कप, मग और टी-शर्ट्स पर प्रिंट करवा सकते हैं। इन पर आप अपनी फीलिंग्स भी प्रिंट करवा सकते हैं। इसके लिए आप ‘आई लव यू ममा’ या ‘यू आर द बेस्ट मॉम’ आदि मां को समर्पित अपना प्यार अंकित करवा करते हैं।

थॉट गिफ्ट :

अगर आप थॉट गिफ्ट देना चाहते हैं, तो की-चेन, पेपर वेट, रिंग वगैरह पर चावल के दानों पर अपनी ममी के लिए खूबसूरत थॉट लिखकर उन्हें गिफ्ट दे सकते हैं।

कॉस्मेटिक्स:

महिलाएं कॉस्मेटिक्स की शौकीन होती हैं। मदर्स-डे पर नेलपेंट, आईशैडो, आईपेन, टोनर, मॉइश्चराजर वगैरह भेंट स्वरूप दे सकते हैं। परफ्यूम, स्किन केयर प्रॉडक्ट व कॉस्मेटिक खरीदने की सोच रहे हैं, तो भी मार्केट से उनकी पसंद के ये प्रॉड्क्स खरीदकर उन्हें भेंट दें।

अक्सेसरीज व ड्रेसेज:

आप अपनी ममी को खूबसूरत ब्रेसलेट, ईयर रिंग, या रिंग इत्यादि गिफ्ट कर सकते हैं। इसके अलावा अगर आपकी मां को घड़ियों का शौक है, तो बाजार से अपने बजट के अनुसार सुंदर घड़ी खरीदकर उन्हें दे सकते हैं।

सोशल मीडिया से जोड़ें:

आजकल सोशल मीडिया का दौर है, अगर आपकी मां थोड़ी भी पढ़ी-लिखी है, तो उन्हें सोशल मीडिया की महत्ता और इसके फायदे बताकर उन्हें सोशल मीडिया से जोड़ें। इसके लिए एक एंड्रोयड मोबाइल उन्हें गिफ्ट कर सकते हैं और फिर फेसबुक, ट्वीटर इत्यादि पर उनका एकाउंट बनाकर उन्हें इसके प्रयोग के बारे में बताएं, इस तरह एक नई खुशी उन्हें आप दे सकते हैं।

उनकी फेवरिट जगह पर उन्हें खाने के लिए ले चलें:

मां के खाने जैसा तो कुछ भी नहीं होता, लेकिन मां का भी तो फेवरिट रेस्त्रां होता है न…। तो इस मदर्स डे पर मां के पसंदीदा रेस्त्रां में उन्हें लंच या डिनर के लिए ले जाएं। घर के कामों से उन्हें छुट्टी दिलाइए और कुछ वक्त उनके साथ बिताइए। उनका पसंदीदा खाना आॅर्डर करिए और इस मौके को खास बनाइए।

हेल्थ चेकअप:

याद है जब बचपन में आप थोड़ा भी बीमार होते थे, तो डॉक्टर और नर्स सब बन जाती थी आपकी मां। मां आपकी सेहत के लिए अपनी सेहत की परवाह नहीं करती।

इस मदर्स-डे पर आप अपनी मां को एक हेल्थ चेकअप के लिए ले जाएं, ताकि आगे भी वह आपके लिए ऐसे ही प्यार बरसती रहें।  – रोहित कुमार