जरूर बनाएं घर का बजट
वर्तमान जी भागदौड़ भरी जिंदगी में कब दिन, महीने, साल गुजर जाते हैं, पता ही नहीं चलता। जैसे ही देश-समाज बदल रहा है, रोजगार के साधन बढ़ने की बजाय घट ही रहे हैं। बिजनेसमैन लोगों की एक अलग लाईफ होती है, मगर परेशान होती है हर महीने वेतन पाने वालों के साथ। आमतौर पर मध्यवर्गीय परिवारों में यह देखा जाता है कि माह की अंतिम तिथि तक आते-आते उनके पास खचे के पैसे समाप्त हो जाते हैं।

यह भी कहा जा सकता है कि उनकी खर्चों को बोझ उन पर ऐसा पड़ता है कि महीने के आखिर में जेब खाली हो जाती है। इस तरह की समस्या परिवार में तब उत्पन्न होती है, जब वे अपने खर्चों का बजट तैयार नहीं करते। ऐसे में महीने में प्रथम सप्ताह में ही यानि तनख्वाह आते ही बिना हिसाब-किताब के खर्चे करने लगते हैं।

यहां ध्यान दीजिए कि अगर यही खर्चे एक बजट बनाकर किये जायें, तो आपको महीने की आखिरी तारीख की चिंता नहीं सतायेगी और आप कुछ बचत भी कर पाएंगे।

तो आइये जानते हैं घर का बजट बनाने के कुछ आसान टिप्स:-

बजट हमें पैसे पर नियंत्रण करने की ताकत देता है और आर्थिक रूप से सक्षम बनाता है।

पहले जो बहुत जरूरी खर्चें हैं, उनकी लिस्ट बना लें। जैसे मकान का किराया, बिजली का बिल, बच्चों की स्कूल फीस, ट्यूशन फीस और घर का राशन इत्यादि। इसके बाद सोचें कि किसी व्यक्ति या कंपनी की बकाया राशि, जैसे किसी किश्त के रूप में देनी है, तो उनकी लिस्ट बनाएं और उसी के अनुसार अपनी तनख्वाह में से वहन करें। कोशिश करें कि सभी खर्च पूरे करके, प्रत्येक माह एक निश्चित राशि बचत हेतू भी अलग से निकालिये।

बजट बनाने के चक्कर में खान-पान से समझौता न करें। बल्कि यह तरीका अपनाएं कि दाल, चावल, गेहूं इत्यादि राशन का सामान आप थोक की दुकान से खरीदें। इससे पैसे की बचत के साथ-साथ अच्छी क्वालिटी का सामान भी आप हासिल कर पाएंगे।

जहां तक संभव हो प्लास्टिक मनी का इस्तेमाल करें। यानि कि आप अपने बिजली बिल, मोबाइल बिल, राशन का सामान, ट्यूशन फीस इत्यादि का भुगतान डेबिट कार्ड, के्रडिट कार्ड या नेट बंकिंग द्वारा करें। क्योंकि जितना कम कैश आपके पास होगा, आपके लिए उतना ही अच्छा है। कई बार कैश हाथ में रहने से अनावश्यक चीजें भी खरीद ली जाती हैं।

जब भी बजट बनायें, तो उसमें अपने बड़ों व बच्चों को भी जरूर शामिल करें और उनकी जरूरतों का भी ध्यान रखें। जैसे बच्चों के लिए खेलने आदि का सामान ले सकते हैं। सामान कुछ भी लें, लेकिन याद रहे कि बच्चों के साथ-साथ आपकी राय भी होनी जरूरी है, क्योंकि सही-गलत का फैसला आपको ही करना है।

बिजली और गैस का उपयोग जरूरत के हिसाब से करें। थोड़ी-थोड़ी बचत भी आपके बजट को और मजबूत बना सकती है। बिजली की बचत करने की जानकारी बिजली घर और गैस की बचत करने की जानकारी आप गैस एजेंसी से भी ले सकते हैं।

बजट बनाते समय अपनी आमदनी और खर्चे का रिकॉर्ड सामने रखें, तभी एक सरल और अच्छा बजट बन पायेगा। इसके लिये एक निर्धारित प्रारूप बना लें और उस पर अपनी आमदनी और होने वाले खर्चो को उसमें जोड़ते
जायें।

अपनी पसंद की छोटी-बड़ी चीजों की एक लिस्ट बनायें। देखें कि कौन-सी चीज की जरूरत ज्यादा है, उन्हें ही प्राथमिकता दें। कभी-कभी पसंद के चक्कर में अनावश्यक फिजूलखर्ची हो जाती है और बाद में परेशानी होती है। फिजूलखर्ची को आप शुरु से ही दरकिनार करके चलें। अगर ऐसा नहीं करेंगे, तो फिजूलखर्ची आपकी आदत बन जायेगी और यह आदत आपके लिए परेशानी बन जाएगी।

हो सके तो लोकल मार्केट से ही अच्छा सामान खोजने की कोशिश करें। सुपर मार्केट में सामान तो अच्छा मिल सकता है, लेकिन खर्चा भी ज्यादा हो जाता है और यह कोई जरूरी भी नहीं कि सुपर मार्केट से ही अच्छा सामान मिलेगा। इसके लिए एक कहावत मशहूर है ‘ऊंची दुकान फीका पकवान’। कहने का मतलब कई सुपरमार्केट में पैसों की कमाई के चक्कर में गलत सामान दे सकते हैं। इसलिए सामान जिस भी दुकान से खरीदें, सावधानी जरूर बरतें।

बजट को बोझ न समझें। हो सकता है कि शुरूआत में यह आपको बोझ लगे, लेकिन इससे हुई बचत आपको बाद में बड़ा आनन्द भी देगी। आप चाहें तो इससे हुई बचत को अपनी पत्नी या बेटी को दे सकते है, इन्हें एक छोटा बैंक कहे तो मेरे हिसाब से गलत नही होगा।

हो सके तो बजट बनाते समय बाजार से कुछ लिफाफे खरीद लें और सभी महीने के सभी खर्चो को उन लिफाफों में डाल लें, इससे हिसाब किताब ज्यादा मैनेज रहता है और महीनें भर की टेंशन भी खत्म हो जाती है।

सभी खर्चों के बाद एक लिफाफा अतिरिक्त खर्चों के लिये भी बनायें और इसमें भी कुछ रुपए डाल दें, क्योंकि आकस्मिक खर्चे बताकर नहीं आते और यह आपका बजट भी बिगाड़ सकते हैं।
-गौरव चौहान, हस्तिनापुर

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