किचन गार्डन घर में उगाएं और खाएं ताजी सब्जियां

रसोई-घर-बाग का उद्देश्य:

रसोई-घर-बाग लगाने का उद्देश्य निश्चित रूप से पुष्पोद्यान लगाने के उद्देश्य से भिन्न होता है। रसोई-घर-बाग लगाने का उद्देश्य घर की शाक-सब्जियों की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ण या आंशिक पूर्ति करने का प्रयास करना तथा दैनिक आहार आयोजन में विविधता एवं ताजगी लाने की समुचित मात्रा में हरी शाक-सब्जियां सलाद के पत्ते आदि प्रतिदिन प्राप्त करने का प्रयास करना होता है।

रसोई-घर-बाग लगाने का उद्देश्य मूलत:

उपयोगिता पूरक होता है।
रसोई-घर-बाग लगाने से प्रतिदिन ताजी हरी शाक-सब्जियां, सलाद तथा धनिया आदि की पत्तियां प्राप्त करते रहने की इच्छा की संतुष्टि करने का उद्देश्य प्रधान होता है। सौन्दर्य एवं हरीतिमा स्थापित करने का उद्देश्य गौड़ होता है।

रसोई-घर-बाग से लाभ:

हर मौसम की शाक सब्जियां ताजी एवं हरी अवस्था में उपलब्ध हो जाती हैं।

नींबू, पपीता, केला आदि जैसे फल बाजार से प्राप्त करने की तुलना में कम खर्च तथा सरलता से सर्वदा उपलब्ध हो सकते हैं।

रसोई घर बाग की जैविक गंदगी, गंदा जल, राख, शाक सब्जियों के डंठल छिलके उपयोग में न आने वाले चावल-दाल, शाक-सब्जियों में घोवन आदि के खपाने का अच्छा साधन होता है। इन बेकार पदार्थों का उपयोग खाद के रूप में किया जाता है।

पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम:

नींबू, पपीता, केला तथा अमरूद आदि के वृक्ष पर्यावरण को प्रदूषित होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
घर के पर्यावरण में हरीतिमा

के तत्व की वृद्घि करना:

शाक-सब्जियों के पौधे, लताएं, नींबू, पपीता, केला तथा अमरूद आदि के वृक्ष घर के पर्यावरण की हरीतिमा में वृद्धि करते हैं।

अवकाश के समय का सदुपयोग:

अवकाश के समय परिवार के सदस्य रसोई घर-बाग में काम करके आवश्यकता से अधिक शाक-सब्जियां पैदा कर आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।

मनोरंजन का साधन:

घर के विभिन्न सदस्यों जैसे अवकाश प्राप्त तथा वृद्ध सदस्यों तथा किशोर वर्ग के लिए मनोरंजन का उत्तम साधन होता है, स्वयं लगाये पौधों तथा वृक्षों को फलते-फूलते तथा बढ़ते देखकर नैसर्गिक सुख-रचनाकर होने का सुख होने की अनुभूति होती है।

प्रकृति से जुड़े रहने का अहसास:

आज की भौतिकवादी दुनिया में मनुष्य प्रकृति से दिनोदिन दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में वहां पर बैठकर अथवा उसमें कामकर बीजों को बदलते हुए तथा फलते-फूलते हुए देखकर उनसे जुड़े होने तथा उनके माध्यम से प्रकृति से जुड़े होने का अहसास होता है।

स्वास्थ्यप्रद एवं स्वादिष्ट:

बाजार से खरीदकर लायी गयी शाक, सब्जियों की तुलना में रसोई-घर-बाग से प्राप्त शाक-सब्जियां अधिक स्वास्थ्यप्रद एवं स्वादिष्ट होती हैं तथा इनका पोषणमान भी ज्यों का त्यों बना रहता है।

आहार में विविधता:

रसोई घर में लगे हुए सलाद सोआ, मेथी, धनिया, लहसुन, मूली, गाजर, टमाटर, हरी मिर्च तथा पालक आदि शाक-सब्जियों की सहायता से गृहिणी तत्काल ही विभिन्न प्रकार के सलाद तथा व्यंजन बनाकर परिवार के लिए आहार आयोजन में आकर्षण तथा विविधता ला सकती है।

बोंसाई तकनीक का उपयोग:

बोंसाई तकनीक के द्वारा कम जगह और छोटे पौधों में सब्जियां तथा फल तैयार किया जा सकता है। इन वृक्षों के लघु रूप में मूल वृक्षों के सभी गुणों का समावेश होता है। इस प्रकार से बोंसाई तकनीक का प्रयोग करके कम जगह तथा छोटे पौधों के सहारे विभिन्न प्रकार की शाक-सब्जियां उपलब्ध की जा सकती हैं।

विभिन्न सब्जियों के बीज एवं पौधे लगाने का समय:

जनवरी-तरबूज, खरबूजा, मूली, चुकन्दर, धनियां, बन्दगोभी, लोबिया, भिण्डी, कद्दू, ककड़ी, करेला व हरे साग।
फरवरी-भिण्डी, बैगन, चौलाई, करेला, परवल, कुंदरू, ग्वारफली, लोबिया।

अप्रैल-भिण्डी, ककड़ी, करेला, कद्दू, परवल, कुंदरू।
मई-अधिक गर्मी के कारण जमीन सूख जाती है, अत: कोई फसल नहीं बोयी जाती, इसके बावजूद यदि सिंचाई का अच्छा साधन है और पौधों को नियमित पानी दिया जा सकता है, तो घुइयां, भिण्डी, टमाटर, हरा धनिया, पालक, हरी मिर्च, पैदा की जा सकती है। गर्मी में हरा धनिया बहुत महंगी मिलती है।

जून-लौकी, तोराई, मिर्च, भिण्डी, अरबी, सेम, करेला, भुट्टा, टमाटर तथा मूंगफली, गोभी।
जुलाई-खरीफ प्याज, बैंगन, शकरकंद, चुकन्दर, धनिया, पोदीना, अदरक, गाजर, केला, सेब, शलजम।
अगस्त-मध्यम फूल गोभी, गांठ गोभी, शलजम, गाजर, भिण्डी, टमाटर, मूली, पालक, लोबिया धनिया।

सितम्बर-टमाटर, पपीता, मूली, चुकन्दर, फूलगोभी, परवल, आलू, गाजर।
अक्टूबर-मटर, बैगन, फूल गोभी, बन्द गोभी, गाजर, आलू, मेथी, पालक, चौलाई, चुकन्दर, शलजम, हरी प्याज, मिर्च, टमाटर तथा पत्तों वाले साग।

नवम्बर-मटर, मूली, शलजम, चुकन्दर, बन्दगोभी, आलू, हरे साग, धनियां, प्याज टमाटर।
दिसम्बर-प्याज हरे साग, मूली।
-(हिफी)