सेहत का खजाना

हमारे जीवन में रोज जो हम खाने-पीने में उपयोगी दृव्य लेते हैं, उनको हम औषधी रूप में कैसे ले सकते हैं।

आईए जानें

1. चाय:-

भारत में चाय का प्रचार 17वीं शताब्दी में इंग्लैंड की ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा हुआ। चाय, गरम, दीपन पाचन, निद्रा-नाशक, पेशाब उत्पन्न करने वाली, सिरदर्द नाशक, आंखों के दर्द में लाभदायक, मनोविकार, सूजन और प्यास को कम करती है। इसके प्रकार निम्न हैं:-

1. सफेद चाय (White tea)
2. काली चाय (Black tea)
3.हरी चाय (Green tea)
औषधीय प्रयोग:-

1. सिरदर्द:-

चाय के पत्तों को उबलते पानी में भिगोकर 6 घंटे रखना है। छानकर 50-100 ML (एमएल) इस पानी को पीने से सिरदर्द कम होता हैं।

2. नेत्ररोग:-

6 घंटे ताजी हरी चाय की पत्तियों को पानी में भिगोकर उसे छानकर वो पानी आंख में दिन में 3-4 बार 1-2 बूंद डालने से आंखों की लाली, सूजन, व दर्द कम होता है।

3. Oral-4lcers

गले में मूंह के छालों में चाय के काढ़े से दिन में 2-3 बार कुल्ला करने से जख्म जल्दी भरते हैं।

4. पुराना नजला:-

चाय का काढा (15-20 एमएल)+ 10-20 ग्राम मुलेठी चूर्ण मिलाकर लेने से जल्दी आराम मिलता है।

5.पेटदर्द:-

गैस के अटकने से होने वाले पेट दर्द में चाय के काढ़े में पुदीना और अक्करकारा मिलाकर पका लें व इस काढ़े का सेवन करें।

6. आग से या गर्म पानी या तेल गिरने पर जले हुए हिस्से पर चाय के काढ़े में डुबोई सूती कपड़े की पट्टी रखें व ऊपर से ठंडा किया काढ़ा थोड़ा-थोड़ा डालते जाए इससे फफोले व दाग नहीं पड़ते जली हुई त्वचा पे।
7. किसी चोट के घांव या जख्म को भरने के लिए काली पीसी चाय की पत्ती डालने से खून निकलना बंद होता है व घांव जल्दी भरता है।

हानि:-

चाय के अधिक प्रयोग से,
एसिडिटी (तेजाब बनना)
नींद न आना
पेट में जख्म
भूख न लगना
ये नुकसान हो सकते हैं।

तिल:-

बहुत ज्यादा उपयोगी द्रव्य है। काले तथा सफेद तिल पाए जाते हैं जिसमें काले तिल तथा उनका तेल औषधी रूप में ज्यादा उपयुक्त होता है।
इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में Fats, Proteins, Carbohydrats Calcium अन्य खणिज तत्व जो शरीर के लिए उपयोगी है, जैसे Phosphorus, Vit ABCE पाए जाते हैं।

गुण/उपयोग:

काले तिल उत्तम:-

उससे कम सफेद तथा लाल तिल सबसे हीणा गुण के होते हैं।

तिल:-

ऊष्ण, बलदायक, बालों के लिए हितकर, दूध को बढ़ाने वाली, दांतों को मजबूत करने वाली, मूत्र के प्रवाह को कम करने वाली, दीपन पाचन और बुद्धिवर्धक होते हैं।

काले तिल:-

पुरुषों में शुक्राणु तथा वीर्यवर्धक होते हैं।
औषधीय प्रयोग

बालों के लिए:-

काले तिल का शुद्ध तेल सिर पे मालिश करने से बाल असमय सफेद नहीं होते।

मुखरोग:-

इसमें CA (कैल्शियम) की मात्रा अधिक होती है। जिसके कारण रोज 20-25 ग्राम तिलों को चबा-चबाकर खाने से दांत मजबूत होते हैं।

मुंह में तिल तेल को भरकर 5-10 मिनट रखने से (मसूढ़ों से खून निकलने) में लाभ होता हैं।

तिल और मिश्री को उबालकर पिलाने से सूखी खासी में लाभ होता है।

Piles/बवासिर के लिए-5-10 ग्राम तिल पीसकर +10 ग्राम मक्खन के साथ लेने से अर्श में लाभ होता तथा (दिन में 3 बार खाने से पहले लेना) खून निकलना बंद होता है।

तिल के तेल का Enema भी बवासिर में लाभकारी है।

जिन स्त्रियों में अनियमित महावारी आती हो उनको रोज 1-2 ग्राम तिल के चूर्ण को दिन में 3-4 बार पानी के साथ लेने से महावारी नियमित आती है।

तिल का काढ़ा बनाकर 30-40 एमएल रोज सुबह शाम पीने से भी मासिक धर्म नियमित होता है।

तिल और सोंठ चूर्ण:-

समभाग मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में 3-4 बार सेवन करने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है तथा हड्डियां मजबूत होती है।

4. जिन बच्चों को रात में बिस्तर गीला करने की आदत हो, उनके लिए बच्चों को तिल खिलाना बहुत लाभदायक है।

बाह्य प्रयोग:-

तिल+हल्दी पीसकर पानी में मिलाके लेप करने से मकड़ी के दंश में उपयोगी विषनाशक हैं।

रोज तिल तेल की मालिश से हड्डियों में मजबूती मिलती है। कमर दर्द, वातरोगों में लाभदायक हैं।

तिल को पीसकर जलने वाले स्थान पे लेप से जलन कम होती है, दाहशामक है।

तिल को पीसकर दूध मिक्स कर सिर पे लेप करने से सिरदर्द (सुर्यावर्त) में लाभकारी है।

मात्रा बीज चूर्ण-3-6 ग्राम

तेल-10-20 एमएल

काढ़ा-30-40 एमएल

हानि:-

गर्भावस्था के पहले महीने में गर्भपात हो सकता है, इसलिए उस समय तिल नहीं खाने चाहिए।

गाजर

सर्दियों में पर्याप्त मात्रा में प्राप्त होती है। इसका उपयोग शाक सलाद अचार मुख्बा, जूस के रूप में करते हैं।

गाजर में Caratein nit a (विटामिन-ए) बनाने में सहायक खनिज सबसे ज्यादा मात्रा में पाया जाता है।

1. इसमें इसके अलावा Vit B, D,C होता हैं।

2. इसको महीन पीसकर या कद्दू कस करके खाने से शरीर में Caratein का शोषण ज्यादा अच्छे से होता है।

3. इसके बीजों में एक सुगंधित तेल होता है जो स्त्रियों के लिए बहुत उपयोगी है। (गर्भाशय/बच्चेदानी) के लिए।

औषधीय प्रयोग:-

नेत्र-

आंखों की रौशनी बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम

मुखरोग:-

गाजर के ताजे पत्तों को चबाने से मुंह के छाले, मुंह की दुर्गंध नष्ट होती है। मसूढों से खून आना बंद होता है।

गाजर के रस में मिश्री मिलाकर उसमें काली मित्र छिड़कर लेने से खासी में लाभ कक आराम से बाहर निकलता है।

हृदय: (हार्ट) के लिए बल्य है

1.गाजर कीसके दूध में उबालकर, मिश्री या गुड मिलाकर खाने से हृदय को मजबूती मिलती है। (गाजर का हलवा)

2. इससे हृदय को ताकत मिलती है और खून की कमी भी मिटती है।

कृमि पेट:-

कीसकर खाने से या पानी में भिगोकर 6 घंटे पानी छानके 20-40 एमएल मात्रा में पीने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।

अरूचि:-

भूख न लगती हो, पेट में आफारा हो, दर्द हो तो, कच्ची गाजर काटकर उस पर काली मिर्च, संधानमक, पिप्पली चूर्ण 1/2 ग्राम छिड़कर खाने से भूख बढ़ती है।

अतिसार-

10-20 एमएल गाजर का रस पीने से दस्त में आराम मिलता है।

बवासिर-

दही की मलाई +10-20 एमएल गाजर का रस पीने से खूनी बवासिर में आराम मिलता है।

यकृत:-

गाजर का सिरके में डाला हुआ अचार खाने से लीवर की वृद्धि सूजन में आराम मिलता हैं।

पीलिया-

गाजर का काढ़ा 20-40 एमएल पीने से Jaundice पीलिया में लाभ मिलता हैं।

मासिक विकार-

गाजर का काढ़ा सुबह शाम पीने से बच्चेदानी से दूषित पदार्थ बाहर निकालकर, गर्भाश्य शुद्दी करता है।

कुछ दिन लगातार लेने से मासिक धर्म ठीक प्रकार से होने लगता है तथा उस दौरान होने वाला कष्ट भी ठीक होता हे।

प्रसव कष्ट:-

10 ग्राम गाजर बीज+100 ग्राम पत्तों का काढ़ा 20-30 एमएल पीने से प्रसव के दौरान होने वाला कष्ट कम होता हैं।
गाजर को उबालकर पीसकर जले हुए स्थान पर लेप लगाने से लाभ जलन कम होती है।

गाजर के रस में चुटकी हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाने से मुहांसों में लाभ।

उपयुक्त अंग-पत्ते कंद, बीज
मात्रा (रस)- 20-40 एमएल

4. मक्का

भुट्टा खाने में पौष्टिक तथा रूचिकारक होता है।
आज कल Sweet corn का चलन बहुत ज्यादा है, इसमें Carbohydrats तथा Starch की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसमें folic acidvit b12 तथा Niacin नामक खनिज अधिक मात्रा में उपस्थित होता है। Carbohydrats तथा Starch ज्यादा मात्रा में होने के कारण Athelets के लिए उत्तम उर्जा का स्त्रोत है।

औषधीय उपयोग:-

मूत्रवह संस्था:- भुट्टे के कोमल बाल वेदनाशामक, पेशाब उत्पन्न करने वाले गुर्दे तथा गुर्दे की सूजन और पत्थरी दूर करते हैं। इसका काढ़ा बनाकर पिलाना लाभदायक है

– मूत्रदाह और पेशाब करते समय वेदना के लिए मक्के का काढ़ा 15-20 ML लेना चाहिए।

बल्य:-

बल्य पुष्टिकारक, दुर्बलता नाशक TB के मरीजों के लिए लाभदायक हैं।

– बिस्तर में पेशाब करने वाले बच्चों में मक्के की रोटी लाभदायक हैं।

– भूना हुआ मक्का Protein कर उत्तम Source हैं।

– फोलिक एसिड की मात्रा अधिक होने से गर्भिणी स्त्रीयों में लाभदायक।

– स्वीट कोर्न का पेस्ट बनाकर मुंह पर लेप करने से मुहांसे और छाईयों में लाभ मिलता है।

निषेध:-

ज्यादा मात्रा में स्टार्च और कार्बोहाईड्रेट्स होने के कारण शुगर के मरीजों को नहीं लेना चाहिए।

बदाम:-

पौष्टिक, ब्लवर्धक, मेवे के रूप में उपयोगी होते हैं।

Globulin Protein++ अधिक मात्रा में पाया जाता है।

Vit A,b, calcium Phosphorus भी बादाम में होते हैं।

औषधीय उपयोग :-

शिरोरोग : –

सिर से संबंधित सभी बीमारियों में लाभदायक है।

– कड़वे बादाम को पीसकर सिर पर लेप करने से सिर की जूएं (लीखे) मर जाती है।

– सिर की नाड़ियों को मजबूत करने के लिए तथा स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए नियमित रूप से बादाम का सेवन करना चाहिए।

– गर्मियों में दूध या पानी में भीगोकर खा सकते हैं।

नेत्ररोग :-

नेत्राभिष्यंक (conjunctuitoin) – आंखों की सूजन, आखों में लाली को ठीक करने हेतू बादाम गिरी पीसकर+घी 1 चम्मच+मिश्रीी 5 ग्राम सुबह खाली पेट सेवन करना चाहिए।

दंतरोग:-

बादाम छिलकों को जलाकर दांतों पर रगड़ने से दंत विकारों का शमन होता है।

खांसी : –

1 चम्मच बादाम तेल के सेवन से खांसी (सूखी) में आराम मिलता है।

पेट के रोग:

– पेट में दर्द या गैंस अटकने पर या भूख न लगने पर 4-5 बादाम को अंजीर 4-5 के साथ पीसकर खाने से हल्का दस्त पेट साफ होता है। और आंतों की पीड़ा का शमन होता है।

प्रजनन संस्था:

– बादाम गिरी व मिस्री के सेवन से वीर्य वृद्धी तथा पुरूषों में वीर्य से संबधित विकारों में आराम मिलता है।
– प्रसूता स्त्रीयों में 3-5 ग्राम बादाम चूर्ण + 1 गिलास दूध में मिलाकर पीने से स्तन्य वृद्धि होती है।

– बादाम पीसकर लेप करने से खुजली, घाव फोड़ो में आराम मिलता है।

मानस रोग:

– बीजों के नियमित सेवन से hysteria नामक रोग से लाभ मिलता है।

– किसी भी प्रकार के शारीरिक दौबल्य के लिए जैसे कई बार बुखार के उपरांत, टीबी के पेशंट में, आॅपरेशन के बाद अथवा शारीरिक शक्ति वर्धन के लिए – 7 ग्राम बादाम+ 7 ग्राम अश्वगंधा + 5 ग्राम मिस्री मिलाकर उपर से दूध लेने से तुरंत उर्जा मिलती है।

– कच्चे बादाम के हरे छिल्के में Bitiylinic acid नामक तत्व पाया जाता है तो स्तन कैंसर को बढ़ने तथा फैलने से रोकता है।

सेब :-

पूरे विश्व में ज्यादा उत्पन्न तथा सेवन किया जाने वाला फल हैं।

Miracle fruit तथा

Nutritional Power house के नाम से जाना जाता है।

फल में Vit A,B,C, Pottassum, Magnesum Loha और बहुत ज्यादा मात्रा में Antioxidents, Fibre पाये जाते हैं।

सेब फल केंसर, शुगर, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग होने से रोकता हैं।

उपयोग:-

दिमागी नसों की सूजन कम करके, याददाश्त शक्ति बढ़ाता है।

Journal of Alzhimers Disese में प्रकाशित अनुसंधान में लिखा सेब का जूस पीने से दिमाग में Neurotransmitterकी उत्पत्ती होती है, जिससे याददाश्त शक्ति बढ़ती है।

सेब के सेवन से खून में गांठे उत्पन्न होने की प्रवृत्ति कम होती है जिससे दिल का दौरा और अधरंग होने के चांस कम होते हैं।

Breast cancer रोकने में उपयोगी है।

पके सेब के रस 100 एमएल+मिश्री 20 ग्राम सेवन से खांसी और चक्कर में लाभदायक है।
सेब का मुरब्बा लेने से आंत तथा पेट की तकलीफे कम होती है।

भूख बढ़ती है।
बिच्छु के कांटने पे- 100 एमएल सेब का रस+1/2 ग्राम कपूर सेवन करने से विष का असर कम होता है।

सावधानियां

अति सेवन से दांतों को नुकसान हो सकता है। खाने के साथ लेने से ज्यादा लाभदायक होता है।
सेब के बीज में Cyanide Poison/जहर होता है, इसलिए बीज नहीं लेने चाहिए। – डॉ. मीना इन्सां एमडी आयुर्वेदा