हमने तो नाली (घग्गर) देखने जाना है। नहीं, अभी जाना है : सत्संगियों के अनुभव

पूज्य डॉ. एमएसजी (हजूर पिता जी) का रहमो-करम

प्रेमी सम्पूर्ण सिंह इन्सां एडवोकेट सुपुत्र स. प्रीतम सिंह जी गांव अमरपुरा राठान तहसील पीलीबंगा जिला हनुमानगढ़ (राजस्थान)। वकील साहब खुद से बीते (आपबीती) और आंखों देखा सतगुरु मुर्शिदे कामिल पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के रहमोकरम का एक अद्भुत कमाल (प्रत्यक्ष करिश्मा) लिखित रूप में इस प्रकार बताते है। सतगुरु मुर्शिदे कामिल की अपार रहमत का वर्णन इस प्रकार है।

सन् 1964 में घग्गर नदी (नाली) में पीछे से बहुत ज्यादा पानी आने करके हमारा गांव घग्गर नदी के बाड़ के पानी में पूरी तरह से डूब गया था। हम लोगों ने अपने गांव से करीब तीन किलोमीटर दूरी पर एक ऊंची जगह में अपने मकान बना लिए और वहीं पर रहने लगे। उपरान्त सन 1972 में हमारे गांव के नजदीक से गुजरती नहर पर सरकार की तरफ से बहुत बड़ा बांध बना दिए जाने करके घग्गर नदी का पानी हमारे गांव में आना बंद हो (घग्गर नदी में बाढ़ आने का खतरा टल) गया तो हम लोग 1987 में वापस गांव में लौट आए और घग्गर (नदी) की बाड़ से बर्बाद (ढहि-ढेरी) हुए अपने मकानों को नए सिरे (फिर) से बनाकर वहीं रहने लगे।

भाणा मालिक का, कि सन 1988 में घग्गर नदी में एक बार फिर पीछे से एकदम इतना ज्यादा पानी आ गया कि सारे गांव में कई-कई फुट पानी भर गया। सारा गांव खाली हो गया। लोग अपना माल असबाब (सामान वगैरह) लेकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए। हम भी अपना सारा सामान आदि लेकर उस पहले वाली ऊंची जगह पर जाकर रहने लगे।

नदी पर बनाए उस बांध पर हम सभी गांव वासी दिन रात मिट्टी लगाते क्योंकि पानी का स्तर पल-पल बढ़ता चला जा रहा था। हम लोग बांध पर मिट्टी लगाकर उसे ऊंचा करते और देखते तो थोड़ी देर में पानी वहां (उसी स्तर) तक पहुंचा होता। घग्गर में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा था और इसकी खबरें खबरों के बुलिटनों में बराबर हमारे पूरे एरिया क्या, पूरे राजस्थान में पहुंच रही थी।

अर्थात यह भी कह सकते हैं कि हमारा गांव पूरी तरह घग्गर की मार में आ चुका था। क्योंकि इतना बड़ा ऊंचा बांध जिसे मिट्टी लगा-लगाकर हमने और भी ऊंचा कर दिया था अगर वह पानी के तेज बहाव में आ जाता है तो बांध के पीछे रुका सारे का सारा पानी और पानी, की स्पीड कितनी हो सकती है, आप लोग खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि कई फुट ऊंचे बांध के पीछे रूके पानी को अगर एक दम छोड़ दिया जाए तो कितनी तेज स्पीड होगी, सब कुछ बहाकर ले जाएगा ।

अगर कुल मालिक का फरिश्ता उस रात हमारे यहां न आता तो हमारा (समस्त गांववासियों का) शायद वजूद भी नहीं होता। और वो अल्लाह परवरदिगार का सच्चा फरिश्ता है स्वयं पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी (डॉ. एमएसजी) इन्सां। जी हां, पूज्य गुरु जी तब डेरा सच्चा सौदा गुरगद्दी पर विराजमान नहीं हुए थे, यह घटना तब की है। पूज्य गुरु जी की गुरगद्दीनशीनी तो 1990 में हुई है, परंतु उपरोक्त घटना 1988 की है।

पूज्य शहनशाह जी उस रात हमारे यहां पधारे और उन्होंने स्वयं ऐसा कोई करिश्मा किया कि पानी उसी रात से ही उतरना शुरू हो गया था।

उक्त घटनाक्रम इस प्रकार हुआ। जैसा कि सभी जानते हैं कि पूज्य गुरु जी गांव श्री गुरुसरमोडिया तहसील सूरतगढ़ जिला श्री गंगानगर के रहने वाले हैं। श्रीगुरुसर मोडिया में ही मेरी बुआ जी और मेरी एक बहन भी रहती हैं।

मेरे दो भांजे प्रगट सिंह व जसवीर सिंह अपने गांव से (घग्गर नदी में आई बाड़ के खतरे का समाचार सुनकर क्योंकि हमारा गांव खाली हो चुका था या करवा लिया गया था ऐसा समाचारों के माध्यम से वे जानते थे, हमारी मदद के लिए आ गए थे। उस दिन पीछे से घग्गर में पानी और अधिक छोड़े जाने पर हमारे उस बांध के टूटने की लगभग सौ फीसदी संभावना बन गई थी कि कभी भी टूट सकता है। हम लोग मिट्टी पर मिट्टी डालकर बांध लगाकर उसे और ऊंचा, और ऊंचा कर रहे थे, लेकिन पानी का स्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा था।

हालांकि हम लोग पूरी तरह से सतर्क थे और जितना बन पड़ रहा था, हम लोग लगातार लगे हुए थे, अर्थात् जी-जान से कोशिश कर रहे थे कि किसी तरह बांध को टूटने से बचा लिया जाए। अगर बांध टूटता है तो किसी के यहां कुछ भी नहीं रह जाएगा, ना माल-असबाब, ना जीवन और ना कुछ और क्योंकि अगर बांध जरा सा भी कहीं से टूटता है तो नदी का पानी परलै का रूप धार कर पल क्षण में (देखते ही देखते) सब कुछ बहा कर ले जाएगा।

पानी बढ़ने की खबरें थोड़े-थोड़े समय बाद (समाचारों के स्पेशल बुलेटिन के माध्यम से) सब कहीं पहुंच रही थी। पानी लगातार बढ़ रहा है और हमारे गांव में क्या, पूरे ही एरिया में (लगभग) बाढ़ का खतरा सिर पर मंंडरा रहा था।

वर्णनीय है कि हर मुश्किल की घड़ी में श्रीगुरुसरमोडिया ग्रामवासियों के लिए पूज्य बापू नम्बरदार मग्घर सिंह जी का ‘लाडला’ पूज्य गुरु डॉ. एमएसजी हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ही एकमात्र सहारा था। गांव में उस समय कोई हस्पताल तो क्या कोई डाक्टर भी नहीं था, कोई बुजुर्ग, कोई बच्चा बीमार होता या किसी बहन की डिलविरी आदि में बाधा कभी पड़ती तो वे सब पूज्य बापू जी (नम्बरदार साहिब) के घर को दौड़ते। पूरे गांव में उस समय एक पूज्य हजूर पिता जी के पास ही जीप हुआ करती थी। दिन है या रात और चाहे आधी रात्रि का भी समय क्यों न हो, पूज्य गुरु जी अपने नेक व अति दयालु स्वभाव करके किसी को भी कभी ‘ना’ तक, या अब तो बहुत रात्रि यानि एक डेढ़ का समय है, सुबह जल्दी ले चलेंगे, ऐसा कभी नहीं कहा करते थे। हालत सीरियस है तुरंत जीप निकाली और उन्हें इलाज के लिए, जहां भी वो चाहते ले जाते।

मेरी बहन जी को जहां हमारा फिक्र था, वहीं अपने बेटों की चिंता भी सताने लगी कि बांध टूट गया तो क्या होगा। उस दिन उनसे भी रहा नहीं गया, क्योंकि उन्हें पता चल चुका था कि रात निकलनी मुश्किल है, वह दौड़ी दौड़ी पूज्य नम्बरदार जी के घर गई और पूज्य गुरु जी से विनती है कि आप जी को अभी मेरे मायके अमरपुरा राठान जाना है, और उसने वहां की सारी स्थिति बता दी और यह भी कहा कि मेरे दोनों बेटे प्रगट व जसबीर सिंह भी वहां पर गए हुए हैं और बांध कब टूट जाए, पल का भी भरोसा नहीं है।

उस समय रात्रि के करीब 9:00 बजे थे। पूज्य पिता जी पारिवारिक रिश्ते के अनुसार मेरी बहन जी को ‘ताई जी’ कह कर बुलाया करते थे, कहने लगे कि ताई, अभी ही चलते हैं। और यह कहकर पूज्य पिता जी ने अपनी जीप स्टार्ट की और मेरी बहन को जीप में बिठाकर हमारे गांव अमरपुरा राठान पहुंच गए। उस समय रात्रि के करीब 12:00 बजे का समय होगा। स्थिति बहुत ही भयानक थी, हम सभी लोग बहुत ही भयभीत थे।

यह सब देखकर पूज्य शहनशाह जी ने कहा कि हमने तो अभी नाली (घग्गर) को देखने जाना है, जहां बांध बंधा है। पूज्य गुरु जी की इस बात पर हमारे घर के सभी लोग, बड़े बुजुर्ग आदि कहने लगे कि अब तो बहुत देर रात का समय है। चहुंओर घोर अंधेरा है और सब और पानी ही पानी फैला हुआ है। आप सुबह चले जाना। लेकिन पूज्य पिता जी कहते कि नहीं, अभी ही जाएंगे।

परिवारवाले बार-बार कहे कि इतनी देर रात को न जाएं। पूज्य शहनशाह जी को तो सब मालूम था कि अगर नहीं गए यानि घग्गर को काबू नहीं किया तो परलै क्या, महा परलै भी आ सकती है। और पूज्य शहनशाह जी आए हमें बचाने के लिए ही थे। परिवारवालों के लाख कहने के बावजूद भी पूज्य शहनशाह पिता जी उसी समय बिना देर किए नाली (घग्गर) पर पहुंच गए।

सतगुरु प्यारे की रहमत का यह प्रत्यक्ष चमत्कार (चमत्कार ही कहेंगे क्योंकि हमारे लिए इससे बड़ा करिश्मा चमत्कार और क्या हो सकता है) सभी ग्रामवासियों ने भी अपनी आंखों से देखा है कि पूज्य पिता जी के नाली पर पहुंचने के तुरंत बाद, सतगुरु शहनशाह जी ने नाली पर क्या किया, और क्या उसे कहा, यह हमें किसी को नहीं पता परंतु इतना जरूर हमने देखा कि नदी में पानी का स्तर उसी क्षण से बढ़ना रूक गया और आधे घंटे बाद पता चला, समाचार आया और हम सभी लोगों ने भी देखा कि नदी में पानी उतरना शुरू हो गया था। सतगुरु जी की कृपा-दृष्टि से नदी के बांध के टूटने का खतरा बिल्कुल टल गया था।

इस घटना का जिक्र स्वयं पूज्य शहनशाह पिता जी ने अपने पवित्र मुख से दो बार सरेआम सत्संग के दौरान (गुरुगद्दी पर विराजमान होने के बाद) अपने वचनों में भी किया है कि हम नाली पर गए और वहां पर हाथ मुंह धोया और उपरान्त आधे घंटे बाद देखा पानी उतरना शुरू हो गया।’

वर्णनीय है कि यह घटना पूज्य गुरु जी के गुरगद्दी पर विराजमान होने से करीब दो साल पहले की है। श्रीगुरुसरमोडिया के संत श्री त्रिवैणी दास जी ने पूज्य गुरु जी के अवतार धारण करने पर पूज्य बापू जी को पहले दिन ही स्पष्ट कर दिया था कि ये कोई आम बच्चा नहीं है। नम्बरदार जी, आप जी के घर में स्वयं परमेश्वर कुल मालिक परम पिता परमात्मा रब्बी जोत प्रकट हुई है तो ऐसे छोटे-मोटे करिश्मे पूज्य गुरु जी के अपने बचपन में और बचपन से गुरगद्दी पर विराजमान होने से पहले तक अनगिनत बार लोगों ने देखें व दिखाए होंगे।

संत-सतगुरु कभी भी अपने आप को सरेआम जाहिर नहीं करते और न कभी कहते हैं कि यह हमने ही किया है, क्योंकि परमपिता परमात्मा का यही नियम है लेकिन मालिक जिसको आंख देता है अंदर की, दिव्यभक्षु वो शख्स भली-भांति पहचान व समझ भी लेता है। क्योंकि भगवान तो भगवान है और बंदा बंदा ही है। तो कई बार बंदा मालिक की उस अपार खुशी को ज्यादा हजम नहीं कर पाता और वह मक्खण शाह लुबाणे की तरह सच्चाई का होका भी सरेआम दे देता है कि ये स्वयं ही खुद-खुदा है। सच्चा सतगुरु है।

सच्चे मुर्शिदे कामिल जी हमारी यही अरदास है कि हमेशा आप जी के रहमो करम को पाते रहें, सदा आप जी के गुणगान गाते रहें और इसी तरह आप जी के पवित्र चरण कमलों में हमारी ओड़ निभ जाए जी।