सम्पादकीय :- सफलता का पैमाना, अपने अंदर पॉजिटिविटी लाएं युवा पीढ़ी

मैं फेल हो जाऊंगा! मैं आगे नहीं बढ़ पाऊंगा! मेरे में हिम्मत नहीं। मैं नहीं कर सकता। तो इस तरह आज के दौर में नौजवान पीढ़ी बुरी तरह से नेगेटिविटी का शिकार है। सारे तो नहीं लेकिन ज्यादातर नौजवान इसी प्रकार ही हमेशा नेगेटिव ही सोचते हैं।

आमतौर पर कोई भी काम-कार्य करना है, उससे पहले ही उनके मन में ऐसे नेगेटिव विचार आने लगते हैं। और पॉजिटिव होने पर उन्हें खुद पे भी भरोसा नहीं होता।

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने गत दिनों अपने एक सत्संग, रूहानी मजलिस में देश की युवा पीढ़ी की ऐसी नेगेटिविटी वाली मनोदशा (नेगेटिव सोच) पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें नेगेटिव सोच से बाहर निकलने व पाजिटिव विचार अपनाने का आह्वान किया है कि हे नौजवानों!

जब आप अपने दिमाग में ऐसी नेगेटिविटी बैठा लेते हो अथवा हमेशा ऐसे ही नेगेटिव विचार आपके अंदर चलते रहते हैं, तो इसका सीधा-सा मतलब यही हुआ कि आपका आत्मबल बेहद कमजोर हो गया है। आत्मबल कमजोर होने की ही वजह से आप नेगेटिव पहले सोचते हैं और पॉजिटिव होने पर आपको यकीन नहीं होता।

आपको पहले अपने अंदर से नेगेटिविटी निकालनी होगी तभी आपको अपनी पॉजिटिविटी पर यकीन आएगा और पॉजिटिविटी आने पर ही आप फिर यह कभी नहीं कहेंगे कि ऐसा बाईचांस हुआ होगा। बल्कि आपको अपनी सफलता पर भरोसा होगा, लेकिन इससे पहले अपने अंदर से नेगेटिविटी आपको निकालनी ही होगी।

इन्सान की नेगेटिविटी कैसे खत्म हो सकती है, उसकी आत्मिक कमजोरी कैसे दूर हो सकती है क्योंकि नेगेटिव विचार आत्मिक कमजोरी की वजह से ही आते हैं, और इन्सान पॉजिटिव कैसे हो सकता है, कैसे उसे अपने पॉजिटिव होने पर यकीन आ सकता है, पूज्य गुरु जी ने इसका भी बहुत ही सरल सस्ता व कारगर तरीका बताया है।

न ज्यादा समय बर्बाद करना है और न ही कोई काम धंधा छोड़ना है, जब आप सोने जा रहे हैं, बस कुछ थोड़ा समय वाकिंग टाईम, जब आप वाकिंग पर हैं, नहाने जा रहे हैं, सफर पे हैं, उसी समय को ही अगर एडजस्ट कर लिया जाए तो भी आप की नेगेटिविटी चली जाएगी, आत्मिक कमजोरी आपकी खत्म हो जाएगी और आत्मबल से आप माला-माल होंगे तो फिर सफलता भी आपके कदम चूमेंगी।

पूज्य गुरु जी ने यह भी फरमाया कि सार्इंस भी यही मानती है कि आत्मबल सफलता की कुंजी है। गुरु जी ने समझाया कि वो तरीका एक छोटा-सा मंत्र है जो हमारे पूज्य गुरु संत, पीर-फकीर बताते हैं और उसी का जाप करना है। उसे गुरुमंत्र कहो, कलमां, मैथड आॅफ मेडिटेशन, नाम, शब्द कुछ भी कहो,उसका अभ्यास, उसका लगातार जाप इन्सान के नेगेटिव विचारों को बदल कर रख देता है और उसे पॉजिटिव विचारों से भर देता है।

पैसा एक भी नहीं देना, कोई काम धंधा भी नहीं छोड़ना धर्म, पहरावा भी नहीं बदलना बस, थोड़ा समय निकालकर सच्चे गुरु, पीर-फकीर के सत्संग में दो घड़ी आकर बैठना होगा।

गुरु, संत, पीर-फकीर सत्संग में ही वो मंत्र बताते हैं जैसे-जैसे इन्सान उसका जाप करता जाएगा पता भी नहीं चलेगा कि उसके अंदर से नेगेटिविटी कब पंख लगाकर उड़ गई और कब वो आत्मबल से भरपूर हो गया और फिर आप का यह आत्मबल आपको सफलता की चरम सीमा पर पहुंचा देगा।

आपके अंदर पॉजिटिविटी हमेशा के लिए घर कर जाएगी और यही पॉजिटिविटी है, यानि अपने इसी आत्मबल के सहारे इन्सान सफलता की सीढ़ियां चढ़ता ही चला जाता है।