सफल गृहिणी बनने के लिए महिला को बहुत सी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाना होता है क्योंकि वह घर में सारा दिन रहती है। उसे अपने घर को ‘सुपर’ बनाना होता है घर को सुपर बनाने या सफल गृहिणी बनने हेतु उसे आवश्यकता पड़ती है ‘परिवार के साथ की’।

इसी प्रकार नौकरीपेशा महिला को भी परिवार की मदद की आवश्यकता पड़ती है, तभी वह घर से बाहर 8 से 10 घंटे रहकर बाहर का काम कर सकती है और घर आकर घर की जिम्मेदारियों को निभा सकती है। यदि घर से उसे सहयोग नहीं मिलेगा तो कुछ ही दिनों में महिला हार मान लेगी और दोनों में से किसी एक के साथ न्याय नहीं कर पायेगी।

व्यवसाय करने वाली महिलाओं को तो देर रात तक भी बाहर रहना पड़ता है, मीटिंग्स अटैंड करनी पड़ती हैं, दूसरे व्यवसायी पुरुषों के साथ उठना बैठना पड़ता है। यदि ऐसी महिला को घर परिवार का सहयोग नहीं मिलेगा, प्राय: अपने व्यवसाय में वह कैसे सफल हो पाएगी! व्यवसाय करने के लिए दिमागी रूप से सचेत रहना पड़ता है। यदि महिला को घर परिवार के चक्कर और जिम्मेदारियां पूरी करनी पड़ें तो वह उतने सचेत दिमाग से नहीं, व्यवसाय को समय दे पाएगी और व्यवसाय में भी असफल हो जाएगी।


कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो घर रहकर व्यवसाय करती हैं। यह कुछ बुरा नहीं! पर दोनों कामों के प्रति वे तभी न्याय कर सकती हैं, यदि उनको घर से संपूर्ण सहयोग मिले। पिछले दिनों मेरी मुलाकात मेरी पुरानी सखी अनीता से हुई। मिलने पर पता चला कि वह सरकारी नौकरी छोड़ अपने पति के व्यवसाय में हाथ बंटाती है।

मैंने उत्सुकतावश पूछा कि क्या तुम्हें नौकरी छोड़ने का कोई अफसोस नहीं है! उसने शर्माते हुए कहा, कुछ-कुछ! दो-चार मुलाकातों के बाद उससे बातों के दौरान मैंने महसूस किया कि उस पर कुछ काम का ज्यादा बोझ है! वह स्वतंत्र रूप से न तो अपने मायके परिवार में जा सकती है और न ही अपनी इच्छा के मुताबिक बाजार और स्थानीय रिश्तेदारों के यहां जा सकती है।

उसको देख मेरे मन में आया कि मैं कुछ ऐसी महिलाओं से बातचीत करूं जो घर संभालने के साथ-साथ घर पर रहते हुए कुछ व्यवसाय करती हो।

सबसे पहले मैंने वीना जी से बात की जो बुटीक चलाती हैं। उनसे पूछने पर पता चला कि वो बहुत खुश हैं। घर रह कर बच्चे भी पल जाते हैं और आमदनी भी हो जाती है।

मैंने उनकी खुशी का राज पूछा तो बोली- मेरी सास, मेरे पति और बच्चे सब मेरा ध्यान रखते हैं और घर के कामों को निबटाने में मदद करते हैं। पति महोदय तो धागे, बुकरम, बटन, लैस आदि मुझे सदर बाजार से ला देते हैं ताकि मुझ पर अधिक बोझ न पड़े। सास-ससुर बाहर के पारिवारिक सुख दुख में चले जाते हैं। मुझे तो बस वहीं भेजते हैं जहां अति आवश्यक हो। मायके आदि जाने के लिए कोई रोक-टोक नहीं है। जरूरत पड़ने पर मेरी सास मेरी अनुपस्थिति में सूटों की डिलीवरी कर देती हैं और बुकिंग भी ले लेती है।

अंत में मैंने अनीता जी से पुन:

बातचीत की तो पता चला कि उनके ससुराल में बड़ा परिवार होने के कारण घर का काम भी काफी अधिक होता है और पति की व्यवसाय में मदद भी अवश्य करनी पड़ती थी। परिवार वालों को यह अच्छा नहीं लगता था कि मैं कभी दिन में आराम करूं। उन्हें कुछ बातों का सामना करना पड़ता था, मसलन सारा दिन सोती रहती हो तो काम कब होगा। वे भूल जाते थे कि मैं भी इंसान हूं। नये बड़े परिवार में एडजस्ट करने में मुश्किल आती है और इतने बड़े परिवार का काम करने की मुझे आदत न थी। धीरे-धीरे मेरी सहनशक्ति ने उन्हें आश्वस्त कर दिया कि मैं दोनों काम संभाल सकती हूं!

इससे यह सिद्ध तो हो गया कि सफल बनने हेतु परिवार का सहयोग बहुत आवश्यक है। परिवार वालों को किस प्रकार का सहयोग देना चाहिए,

आइये ध्यान दें इन मुख्य बिन्दुओं पर:-

■ घर पर व्यवसाय करने वाली महिला के आराम का पूरा ध्यान परिवार वालों को रखना चाहिए।

■  व्यवसाय करने वाली महिला का भी दिल करता है कि वह अपने मायके जा कर दो-चार दिन रहे या बीच-बीच में मिलने के लिए जा सके।

■  सगे-संबंधियों के हर सुख-दु:ख पर उसे जाने के लिए न कहा जाए, जहां आवश्यक हो, उसे वहीं भेजा जाए।

■  घर के कामों को निपटाने में परिवार के सभी सदस्य उतने ही जिम्मेदार हैं, जितनी कि वो।

■  परिवार बड़ा है तो घर आने वाले मेहमानों को भी यह समझ लेना चाहिए कि वो पूरा समय उनके साथ नहीं रह सकती या हर बार शॉपिंग आदि पर नहीं जा सकती।

■  जब क्लाइंट मिलने आएं तो परिवार के सदस्य उनसे रूखा व्यवहार न दिखा कर उनको आदर सहित बैठाएं।

■  व्यवसाय करने वाली महिला की मजबूरियों को समझना चाहिए।

■  घर पर व्यवसाय करने वाली महिला को भी पूरा सम्मान दें, जैसे कि नौकरी पेशे वाली महिला को दिया जाता है।

■  व्यवसाय करने वाली महिला को यह भी छूट होनी चाहिए कि स्वतंत्र रूप से वह बाजार जा सके और अपनी सखियों से भी मिल सके।

■  कुछ प्राइवेसी भी उसे मिलनी चाहिए, ताकि वो जब आराम करना चाहे कर सके। हर समय परिवार के सदस्य उसे घेरे न रहें।

■  परिवार के अन्य सदस्यों को भी, हो सके तो जरूरत पड़ने पर, उसके व्यवसाय में मदद करनी चाहिए।
– नीतू गुप्ता