प्राकृतिक रंगों से खेलो होली 13 मार्च विशेष: होली के सूखे रंगों को गुलाल कहा जाता है। मूल रूप से यह रंग फूलों और अन्य प्राकृतिक पदार्थों से बनता है जिनमें रंगने की प्रवृत्ति होती है। समय के साथ इसमें बदलाव आया, होली के ये रंग अब रसायन भी होते हैं और कुछ तेज़ रासायनिक पदार्थों से तैयार किए जाते हैं। ये रासायनिक रंग हमारे शरीर के लिए हानिकारक होते हैं, विशेषतौर पर आँखों और त्वचा के लिए। इन्हीं सब समस्याओं ने फिर से हमें प्राकृतिक रंगों की ओर रुख करने को मजबूर कर दिया है।

अब आप सोचने लगे होंगे कि तो क्या फिर हम कभी चटक रंगबिरंगे रंगों से होली नहीं खेल सकेंगे, इसमें निराश होने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि आप खुद खूबसूरत लाल-हरा, नीला-पीला, केसरिया-गुलाबी रंग घर पर तैयार कर सकते हैं और वह भी बिल्कुल प्राकृतिक तौर पर! होली के ये प्राकृतिक रंग पूरी तरह सिर्फ़ सुरक्षित ही नहीं, बल्कि चेहरे और त्वचा के लिए भी लाभदायक भी माने जाते हैं। तभी तो यदि होली खेलते हुए गुलाल आँखों में चला भी जाए तो आप आराम से होली खेलते रहिए और जब त्यौहार का मज़ा पूरा हो जाए, तब आराम से घर जाकर आँखें धो लीजिए। चलिए, हम आपको गुलाल बनाना सिखाते हैं जो बाज़ार के रासायनिक गुलाल से कहीं ज़्यादा बेहतर होगा और साथ ही सुरक्षित भी। तो आइए, खुद तैयार किए गए इस गुलाल से परिवार के साथ-साथ दोस्तों को भी सराबोर कीजिए और होली का आनंद उठाइए!

लाल गुलाल तैयार करने की विधि

पिसा हुआ लाल चंदन जिसे रक्तचंदन या लाल चंदन भी कहा जाता है, खूबसूरत लाल रंग का होता है। ही यह त्वचा के लिए भी अच्छा होता है। यह सूखा रंग गुलाल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इस रंग के दो छोटे चम्मच पाँच लीटर पानी में उबाले जाएँ, तो उससे बीस लीटर रंगीन पानी तैयार किया जा सकता है। छाया में सुखाए गए गुड़हल या जवाकुसुम के फूलों के पाउडर से लाल रंग तैयार किया जा सकता है।

सिंदूरिया के ईंट से लाल बीजों को भी बतौर रंग या गुलाल इस्तेमाल किया जा सकता है।
लाल अनार के छिलकों को पानी में उबाल कर भी सुर्ख लाल रंग बनाया जा सकता है।
आधे कप पानी में दो चम्मच हल्दी पाउडर के साथ चुटकी भर चूना मिलाइए। फिर एक लीटर पानी के घोल में इसे अच्छी तरह मिलाइए, आपका होली का रंग तैयार।
टमाटर और गाजर के रस को भी पानी में मिला कर रंग तैयार किया जा सकता है।

प्राकृतिक रूप से तैयार हरा गुलाल

मेहँदी या हिना पाउडर को भी बतौर गुलाल इस्तेमाल किया जा सकता है और पानी मिला कर रंग भी तैयार हो सकता है, पर इस रंग के दाग आसानी से नहीं छूटते। यह दीगर बात है कि यह रंग बालों के लिए बहुत लाभदायक होता है। गुलमोहर के पत्तों को अच्छी तरह सुखा कर पीस लें और आपका प्राकृतिक हरा गुलाल तैयार है। गेहूँ की हरी बालियों को अच्छी तरह पीसकर गुलाल तैयार करें। पालक, धनिया या पुदीने के पत्तों के पेस्ट को पानी में मिलाकर रंग तैयार किया जा सकता है। गुलाबी चुकंदर के टुकड़ों को या चुकंदर को एक लीटर पानी में एक पूरी रात भीगने के लिए छोड़ दीजिए और रंगीन पानी बनाने के लिए इस घोल में पानी मिलाकर होली का लुत्फ़ उठाइए।

चटक केसरिया गुलाल

पारंपरिक तौर पर भारत में यह चटक केसरिया गुलाल टेसू के फूलों से बनता है, जिसे पलाश भी कहा जाता है। टेसू के फूलों को रात भर के लिए पानी में भीगने के लिए छोड़ दीजिए। और सुबह रंग का आनंद उठाइए! कहा जाता है इस पानी में औषधिय गुण होते हैं।

चुटकी भर चंदन पाउडर एक लीटर पानी में मिलाने पर केसरिया रंग तैयार हो जाता है।
केसर की पत्तियों को कुछ समय के लिए दो चम्मच पानी में भीगने के लिए छोड़ दें और फिर उन्हें पीस लें। अपने इच्छानुसार गाढ़ा रंग पाने के लिए इसमें धीरे-धीरे पानी मिलाएँ, ज़्यादा पानी से रंग फीका या हल्का जाता है! यह त्वचा के लिए अच्छा तो होता ही है साथ ही साथ बहुत महँगा भी होता है।

रंग बनाने की इन ढेर विधियों में से अगर आपको कोई भी पसंद ना आए तो भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है। पर्यावरण के प्रति संवेदनशील कुछ संस्थाओं ने प्राकृतिक रंगों को पैकेटबंद कर के भी बेचना शुरू कर दिया है।

होली खेलें पर सावधानी से :-

होली हर्षोल्लास व भाईचारे का त्योहार है। लोग एक-दूसरे पर रंग डालकर व चेहरे पर गुलाल लगाकर अपनी खुशी का इजहार करते हैं तथा एक दूसरे से गले मिलते हैं। यह हर्षोल्लास का त्यौहार कहीं गम का त्यौहार न बन जाए, इसका सदैव ध्यान रखना चाहिए।

एक-दूसरे पर रंग डालते समय तथा चेहरे पर गुलाल लगाते समय सावधान रहना चाहिए कि ये आंखों में न चला जाए। अच्छी गुणवत्ता वाले रंग व गुलाल का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि त्वचा को किसी प्रकार का नुक्सान न पहुंचे। नकली व घटिया रंग और अबीर आंखों व त्वचा, दोनों के लिए हानिकारक होते हैं। अबरक मिले गुलाल का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योेंकि ऐसे गुलाल को चेहरे व माथे पर लगाने से त्वचा छिल सकती है।

चूंकि होली रंगों व गुलाल से खेली जाती है, इसलिए प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे टेसू के फूलों का तरल रंग तथा अरारोट का गुलाल। गुलाल में थोड़ा इत्र डालकर इसे और मनमोहक व बढ़िया बनाया जा सकता है। इनके संग होली खेलने से किसी प्रकार की हानि नहीं होगी।

पक्के रंग, पेंट व घटिया गुलाल त्वचा के संपर्क में आते ही प्रतिक्रिया करते हैं और व्यक्ति एलर्जी का शिकार हो जाता है।
इन रंगों से सराबोर त्वचा को साफ करना भी काफी मुश्किल होता है क्योंकि ये रंग रोमकूपों द्वारा त्वचा में प्रवेश कर जाते हैं जिसकी वजह से रगड़ते-रगड़ते भले ही त्वचा छिल जाए लेकिन होली के दिन ये पक्के रंग त्वचा से नहीं उतरते।
होली खेलने के बाद एलर्जी के कारण त्वचा पर लाल-नीले धब्बे उभर आते हैंं। ऐसा होने पर फौरन किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलकर परामर्श लेना चाहिए तथा उसके निर्देशानुसार दवाइयां लेनी चाहिएं। इससे एलर्जी से जल्दी छुटकारा मिल जाएगा।

होली खेलते समय निम्न सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए:-

पूरी बाजू की कमीज, फुलपैंट, पैरों में मोजे तथा सर पर टोपी लगाकर ही होली खेलें। होली खेलने से पहले सिर तथा शरीर पर तेल या वैसलीन लगा लेना चाहिए ताकि रोमकूपों द्वारा रंग व गुलाल त्वचा में न प्रवेश कर सकें।
होली खेलने के बाद रंग से रंगे कपड़ों को जल्दी उतार दें क्योंकि रंगे कपड़े जितने समय तक त्वचा के संपर्क में रहेंगे, त्वचा को नुक्सान पहुंचाएंगे।

अरारोट से बने गुलाल व टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों से ही होली खेलें। ये रंग व गुलाल बड़े व बच्चे सभी के लिए सुरक्षित होते हैं।

यदि होली खेलते समय रंग या गुलाल लगाते ही जलन महसूस हो तो तुरंत किसी मुलायम कपड़े से त्वचा साफ कर के धो डालें।

यदि होली खेलते समय शरीर पर रैश उभर आएं या खुजली होने लगे तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलकर निदान करा लें।

आंखों का बचाव:-

होली के नकली घटिया रंगों व गुलाल से सबसे ज्यादा आंखों को नुक्सान पहुंचने की आशंका होती है, इसलिए घटिया रंगों, छीना-झपटी तथा रंग भरे गुब्बारे आदि से बचना चाहिए।
— अरुणा घवाना