जब भरना हो कोई फार्म :
फार्म (आवेदन-पत्र) एवं जीवन का अन्योन्याश्रय संबंध है। नौकरी, व्यापार, टैक्स जमा करना, बैंक का खाता खुलवाना, परीक्षा का आवेदन-पत्र भरना, बच्चे के नामांकन के लिए फार्म भरना आदि अनेक कार्यों के लिए फार्म भरना ही पड़ता है।

फार्म भरने में अगर चूक हो जाती है तो इच्छित काम या तो नहीं हो पाता या फिर उसमें विलम्ब हो जाता है। नतीजतन बना बनाया काम बिगड़ जाता है।

राजनीति के क्षेत्र में भी फार्म भरने की आवश्यकता होती है। संसद या विधानसभा के चुनावों में तो फार्म भरने में और भी अधिक बुद्धि कौशल की आवश्यकता होती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तो पहली परीक्षा फार्म भरने से ही शुरू होती है।

वस्तुत: फार्म भरना एक कला है और अभ्यास तथा थोड़े से ध्यान देने से और भी अधिक से सीखा जा सकता है।

फार्म भरने से संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारियां यहां प्रस्तुत हैं –

■ जिस किसी भी फार्म को भरना हो, उसे भरने से पहले उसकी फोटो कॉपी करवा लें। फिर उसे ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसके बाद ही फार्म को भरना शुरू करना चाहिए।

■  फार्म के निर्देशों के अनुसार ही फार्म में शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। नाम अधिकतर बड़े अक्षरों (कैपिटल लेटर) में ही लिखे जाते हैं। अपनी ओर से शब्दों को बड़ा या छोटा नहीं करना चाहिए।

■  आजकल फार्मों में नाम आदि लिखने के लिए चतुर्भुजाकार खाने दिये होते हैं। प्रत्येक खाने में एक वर्ण ही लिखा जाता है। एक शब्द के समाप्त होने पर एक खाना छोड़कर ही आगे के शब्द को लिखना चाहिए।

इसका ध्यान रखना होता है कि पूरा विवरण दिये गये खानों के अन्दर ही आ जाये।

■  फार्म को क्रमानुसार ही भरना चाहिए। इससे कोई कॉलम छूटने की संभावना नहीं रहती है। फार्म भरने से पहले उससे संबंधित सभी प्रपत्रों यथा अंकपत्र-प्रमाण-पत्रों की प्रतिलिपियां, जन्मतिथि आदि को पास में रख लेना चाहिए।

■  फार्म को भरते समय ब्लू या ब्लैक स्याही वाले रिफिल (बॉल पैन) का ही प्रयोग करना चाहिए। इससे स्याही फैलने का भय नहीं रहता और लिखावट भी अच्छी रहती है। लाल, हरी आदि स्याही का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

■ जिस स्याही से फार्म भरना शुरू किया गया हो, उसी से फार्म का अन्त भी करना चाहिए। फार्म के शुरू में काली स्याही और अन्त में नीली स्याही से लिखना अनुचित माना जाता है।

■  घर का पता, जन्मतिथि, पिता का नाम, अपना नाम, उत्तीर्ण परीक्षाओं का नाम आदि स्पष्ट अक्षरों में ही लिखा जाना चाहिए। पता साफ एवं स्पष्ट अक्षरों में लिखा हो तो ही आप से पत्रचार संभव है। पता भी पूर्ण होना चाहिए जिससे आप तक पत्र पहुंचे सके।

■  यदि कोई महंगा या लंबा फार्म है तो पहले उसकी फोटो कापी करवा कर रफ भरें। फिर मूल फार्म भरें।

■  फार्म भरते समय इसका पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए कि उसमें कहीं भी कटिंग या ओवर राइटिंग न होने पाये। अगर ऐसी स्थिति आ ही जाये तो रबड़ या ब्लैड से साफ करके पुन: लिखना चाहिए। बैंक एवं डाकघर में खोले जाने वाले एकाउन्ट के फार्मों में यह मान्य नहीं है।

■  अगर फार्म में मांगे गये विवरणों में कुछ समझ में नहीं आये तो जानकार व्यक्तियों से जानकर ही उसे भरना चाहिए। अन्दाज से कुछ भी भर देना अच्छा नहीं होता है।

■  फार्म पर अपने प्रचलित हस्ताक्षर ही करने चाहिए क्योंकि कुछ भी लिख देने पर साक्षात्कार के समय या अन्य समयों में यथा बैंक से पैसा निकालते समय, बीमा की मैच्युरिटी पूरी होने पर, शेयर बाजार में अपनी रकम को निकालने आदि के समय में आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

■  भरे हुए फार्मों को दो-तीन बार ध्यान से पढ़ना चाहिए तथा फार्म भेजने से पहले उसकी फोटो-कॉपी करवाकर अवश्य ही रख लेनी चाहिए।

फार्म में कभी भी गलत सूचना को नहीं देना चाहिए। सबसे अंत में दिनांक देना नहीं भूलना चाहिए।

इस प्रक्रिया से आप फार्म भरने की कला में निपुण हो जायेंगे।
– आनंद कुमार अनंत