आया रखिए पर सावधानी बरतिये

नौकरीपेशा पति पत्नी के घर में छोटे बच्चों को संभालने के लिए आया की उपस्थिति अनिवार्य होती जा रही है। आया रखना नौकरीपेशा मांओं के लिए जरूरी भी है और उनकी मजबूरी भी क्योंकि अब संयुक्त परिवार तो रहे नहीं जहां बच्चा दादी, ताई, चाची के साथ हंसता खेलता बड़ा हो जाता था, बिना अपनी मां की कमी महसूस किए।

अत: परिस्थितिवश कामकाजी मांओं को आया रखना जरूरी हो जाता है ।

लेकिन जब भी आप अपने बच्चे के लिए आया रखें तो इन बातों को ध्यान में रखें:-

■ आया की नियुक्ति से पूर्व निकटवर्ती थाने में उसका रिकार्ड अवश्य चैक व दर्ज करवाएं।

■ यह ठीक है कि आप आया को उसके काम के एवज में पैसे देते हैं, फिर भी आप उसे नौकरानी नहीं मानिए, क्योंकि आप की अनुपस्थिति में वो आपके बच्चे की सार संभाल करने जैसी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी उठा रही होती है- वे झाड़ू पोंछा करने जैसा रूटीन के काम नहीं करती, अत: उसके प्रति अपनी मानसिकता सकारात्मक व व्यवहार मृदु रखिए।

■ आया के साथ बच्चे को कई घंटे बिताने होते हैं। अत: ध्यान दीजिए कि आया साफ सफाई का ध्यान रखे और उसे किसी तरह की गंभीर या संक्रामक बीमारी न हो, वरना बच्चे के संक्रमित होने का खतरा रहेगा, क्योंकि छोटे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।

■ आया को इस बात के लिए ताकीद दें कि दूध पिलाने के बाद बच्चे का मुंह अपनी साड़ी, दुपट्टे या हाथ से नहीं पोंछे। इस काम के लिए आप उसे रूमाल, नेपकिन आदि दीजिए।

साथ ही कुछ दिन आया के तौर-तरीकों पर खास गौर करने के बाद जो कुछ भी गलत लगे, उसके बारे में आया से बात करें व वैसा करने के लिए मना करें, क्योंकि नन्हे बच्चे की आदतें अगर शुरू में ही बिगड़ गई तो बाद में उनमें सुधार लाना मुश्किल हो जाएगा।

■ आया के आने के बाद यदि बच्चे के व्यवहार, स्वास्थ्य व आदतों में अंतर आ जाए तो सावधान हो जाइए और इसकी वजह मालूम कीजिए।

■ अगर आप चाहती हैं कि आया आपके बच्चे को अपने बच्चे सा प्यार करे तो जरूरी है कि आप भी आया को अपना समझें। आप उसकी परेशानियों दिक्कतों को भी समझिए और अगर वह कभी जल्दी जाना चाहे तो जाने दीजिए। कभी कभार देर से आये या कोई गलती करे तो उसे माफ कर दीजिए। हमेशा प्यार व सम्मान से बात कीजिए।

■ आया को आपने बच्चे के काम के लिए रखा है तो सिर्फ वही करवाइए। बर्तन मांजना, झाड़ू लगाना जैसे कामों के लिए उससे नहीं कहिए। अगर आप उसे दिनभर काम में लगाए रखेंगी तो वह चिड़चिड़ी हो जाएगी और अपनी खीझ और गुस्सा बच्चे पर निकालेगी।

■ आया को अपने व पति के आॅफिस का फोन नंबर दीजिए। कॉलोनी में रहती हैं तो अपनी खास सहेली का फोन नंबर भी दीजिए और हां, अपने फैमिली डॉक्टर का फोन नंबर भी दीजिए, साथ ही एक हिदायत भी कि अगर कभी बच्चे की तबियत बिगड़े तो अपने मन से उसे कोई दवा नहीं पिलाए और न ही घरेलू नुस्खे आजमाए।

■ अपने पड़ोसी या सहेली को घर के बच्चे व आया पर नजर रखने को कह जाइए। हो सके तो जल्दी जल्दी आया नहीं बदलें। ऐसा करने से नन्हे बच्चे को एडजस्टमेंट में तकलीफ होगी।

हमेशा याद रखिए कि बच्चे की मां आप हैं और बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास की जिम्मेदारी आपकी और आपके पति की है, इसलिए जब भी घर में रहें अपने बच्चे को अपने साथ रखिए।

उसके काम भी स्वयं कीजिए, अपने हाथों से बनाइए, खिलाइए। इससे बच्चे व आपके बीच तारतम्य बना रहेगा। -एम. कृष्णा राव ‘राज’

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