मौसम विज्ञान में करियर की बेहतर संभावनाएं :

भारतीय मौसम विभाग देश भर में फैले अपने 600 केंद्रों के बड़े नेटवर्क की सहायता से मौसम संबंधी आंकड़े इकट्ठा कर एवं उनका विश्लेषण करके, हमें मौसम के बदलते मिजाज से अवगत कराता है। यह सब मौसम विज्ञान या मेटियोरोलॉजी है। इसके अंतर्गत प्रकृति में हो रहे परिवर्तनों का अध्ययन व आंकलन किया जाता है।

मौसम विभाग पूर्वानुमान के जरिए परिवहन, दूरसंचार, रक्षा तथा विमानन क्षेत्र के लिए मौसम संबंधी सूचनाएं उपलब्ध कराता है।

कौन से कोर्स करें:

मौसम विज्ञान की कई शाखाएं हैं जिनमें से किसी में भी अध्ययन कर अच्छा करियर बनाया जा सकता है। ये शाखाएं हैं क्लाइमेटोलॉजी, साइनोप्टिक मेटियोरोलॉजी, डायनेमिक मेटियोरोलॉजी, फिजिकल मेटियोरोलॉजी, एग्रीकल्चरल मेटियोरोलॉजी व अप्लाइड मेटियोरोलॉजी। जो युवा मौसम विज्ञान में डिप्लोमा या पीजी कोर्स करना चाहते हैं, उनके पास फिजिक्स व मैथ्स विषयों के साथ स्रातक डिग्री होना जरूरी है। उम्मीदवार की आयु कम से कम 17 वर्ष और अधिकतम 25 वर्ष निर्धारित है।

प्रवेश परीक्षा:

मौसम विज्ञान पाठ्यक्रमों में उम्मीदवारों का चयन सामान्यत: प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता है। यह परीक्षा अखिल भारतीय स्तर की होती है, जिसमें मेरिट के आधार पर विद्यार्थियों को विभिन्न राज्यों के कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में प्रवेश दिया जाता है। प्रवेश परीक्षा का स्वरूप वस्तुनिष्ठ होता है। इसमें गणित, भौतिकी, रसायन, सामान्य अध्ययन, इतिहास, समसामयिक घटनाक्रम, भारतीय राजव्यवस्था आदि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इस प्रवेश परीक्षा का माध्यम अंग्रेजी है।

यहां मिलेगा रोजगार:

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग में इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के लिए सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग, विद्युत, डाकतार विभाग व रेलवे जैसे कुछ सार्वजनिक उपक्रमों में भी मौसम विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाती है। साथ ही थल सेना, नौसेना व वायु सेना में भी मौसम से संबंधित जानकारी के लिए मौसम वैज्ञानिकों की जरूरत होती है। इसके अलावा ऐसे कई व्यापार हैं जो अपने ज्यादातर निर्णय मौसम के आधार पर लेते हैं, वे भी मौसम वैज्ञानिकों की नियमित भर्ती करते हैं।

बन सकते हैं सलाहकार:

कृषि मौसम वैज्ञानिक निजी व सरकारी एजेंसियों में अनुसंधान और विकास गतिविधियों में काम कर सकते हैं। इन एजेंसियों के अंतर्गत केंद्रीय और राज्य कृषि विश्वविद्यालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, राष्ट्रीय दूरसंवेदन एजेंसी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, खाद्य व कृषि संगठन आदि शामिल हैं। निजी क्षेत्र के अंतर्गत कृषि मौसम वैज्ञानिक जल संभर प्रबंधन, कमान क्षेत्र और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में लगे स्वैच्छिक संगठनों सहित अनेक संगठनों में सलाहकार के रूप में काम कर सकते हैं। वर्तमान में एग्रीकल्चरल मेटियोरोलॉजी के क्षेत्र में रोजगार के असीमित अवसर हैं। इसके अंतर्गत फसल पालन और पशु पालन पर मौसम के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।

टीचिंग व रिसर्च:

सरकारी क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार के अवसरों के अंतर्गत शिक्षण, अनुसंधान और विकास एवं विस्तार गतिविधियों में वैज्ञानिक, सहायक प्रोफेसर, अनुसंधान अधिकारी, विषय संबंधी विशेषज्ञों और कृषि मौसम वैज्ञानिकों के रूप में रोजगार प्राप्त किया जा सकता है। ये पद विभिन्न विश्वविद्यालयों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर, विज्ञान और प्रौद्यौगिकी विभाग आदि जो उच्च स्तरीय अनुसंधान, विकासात्मक विस्तार, परामर्श सेवाओं, आयोजन और नीति निर्माण गतिविधियों से संबद्ध हैं, में उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मेटियोरोलॉजिस्ट्स की मांग में भारी वृद्धि होगी।

यूपीएससी की परीक्षा:

यूपीएससी(संघ लोक सेवा आयोग), आईएमडी( इंडियन मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट) में ग्रेड-2 (मौसम विज्ञानी) की भर्ती हेतु प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है। इसके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता फिजिक्स, मैथ्स, कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टस डिग्री जरूरी है। एस्ट्रोनॉमी विषय के साथ फिजिक्स या मैथ्स में मास्टर डिग्री धारक व एस्ट्रोफिजिक्स विषय के साथ विज्ञान में मास्टर डिग्री रखने वाले उम्मीदवार भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। चुने गए विद्यार्थियों को आईएमडी, पुणे व नई दिल्ली में एक साल के एडवांस कोर्स से गुजरना होता है।

प्रमुख संस्थान:

देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पीजी स्तर पर मौसम विज्ञान पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इसके अलावा आईआईटी भी मौसम विज्ञान में पीएचडी तथा अन्य उच्च स्तरीय पाठ्यक्रम संचालित करती है।

कई विश्वविद्यालय विज्ञान(गणित) स्रातकों के लिए मौसम विज्ञान में एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करते हैं।

■ जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर www.jnkvv.org

■ अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल www.abvhv.org

■ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर www.igau.edu.in

■इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ साइंस, बैंगलुरू www.iisc.ac.in

■कोचीन यूनिवर्सिटी आॅफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कोच्चि www.cusat.ac.in

■ शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर www.unishivaji.ac.in

■ आणंद कृषि विश्वविद्यालय, आणंद www.aau.in

■ सीसीएस हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार http:hau.ernet.in

■ गोविंद बल्लभपंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर www.gbpuat.ac.in

■ पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना http:web.pau.edu
– नरेंद्र देवांगन