इच्छाशक्ति जगाइए: बेरोजगारी भगाइए : वर्तमान समय में युवा वर्ग जिस समस्या से सर्वाधिक ग्रस्त है, वह है बेरोजगारी!
वस्तुत:

बेरोजगारी की समस्या ने ही युवा वर्ग को इस कदर घेर रखा है कि आम युवाओं के मन में कुंठाओं एवं निराशाओं ने जन्म ले लिया है। प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से स्रातक व स्रातकोत्तर डिग्री लिए युवाओं की एक बाढ़-सी देश में आती जा रही है , परंतु इन शिक्षित युवाओं की बाढ़ को नियंत्रित नहीं किया जा रहा है, जिससे बेरोजगारी की भीषण समस्या और अधिक विकराल ही होती जा रही है।

बेरोजगारी की इस समस्या के कारणों पर अगर गौर किया जाये तो एक कारण स्वयं युवाओं की मानसिकता भी है क्योंकि आज आम युवा शिक्षित हो जाने पर सरकारी नौकरी करने का इच्छुक दिखाई देता है और इस आशा में लाखों युवा अपने जीवन के महत्त्वपूर्ण वर्ष वैसे ही गंवा देते हैं। क्या यह उचित है?

आवश्यकता तो इस बात की है कि युवा स्वयं अपने उद्योग-धंधों की स्थापना पर ध्यान दें परन्तु यहां प्रश्न यह भी उठता है कि उच्च वर्ग के युवाओं के पास तो नये उद्योग स्थापित करने के साधन हो सकते हैं किंतु मध्यमवर्गीय या निम्न वर्गीय युवा पूंजी (धन) के अभाव में उद्योग धंधों की स्थापना कैसे करें?

मध्यमवर्गीय एवं निम्नवर्गीय युवा सम्यक प्रशिक्षण प्राप्त कर लघु उद्योग धंधों की स्थापना करने में समर्थ हो सकते हैं।

प्राय:

आज का युवक स्रातक डिग्री हासिल करने के बाद सरकारी नौकरी को पाने के प्रयास में चार-पांच वर्षों की भागदौड़ में जितना खर्च कर देता है, उतने में ही एक लघु उद्योग की स्थापना की जा सकती है।
लघु उद्योगों की स्थापना के लिए राज्य सरकारें एवं केंद्र सरकार की ओर से अनेक कार्यक्र म चलाये जा रहे हैं, जिनके तहत ऋण की सुविधा मुहैया करायी जाती है। इस क्षेत्र में लगभग सभी राष्टÑीय बैंक भी कार्यरत हैं जो उद्यमियों को विहित शर्तों पर आसान किस्तों में वापसी की शर्त पर ऋण प्रदान करते हैं।

अब प्रश्न उठता है कि कौन-सा उद्योग स्थापित किया जाये जिससे अधिकाधिक लाभार्जन हो सके? इस प्रश्न का उत्तर यही हो सकता है कि पूंजी क्षमता के आधार पर ही लघु उद्योग लगाने की क्षमता सुनिश्चित करनी होगी। लघु उद्योग की स्थापना से पूर्व यह भी सुनिश्चित करना नये उद्यमी के लिये आवश्यक है कि जो उत्पादन वह करने जा रहा है, उसकी बाजार में मांग क्या है? उस उद्यम से संबंधित तकनीकी जानकारी तथा प्रक्रि या की संपूर्ण जानकारी अपने जिले के लघु उद्योग कार्यालय जाकर प्राप्त की जा सकती है।

लघु उद्यमी को यह भी ध्यान रखना होता है कि जिस उद्योग को वह लगाने जा रहा है, उससे संबंधित कच्चे माल की उपलब्धता, व्यापार विशेष के प्रति रूझान व उत्पादन की गुणवत्ता को कैसे बनाये रखा जा सकता है।
उद्योग के चयन के पश्चात उसकी स्थापना किस स्थान पर की जाये, इसका ध्यान रखना भी आवश्यक होता है। लघु उद्योग की स्थापना संबंधी स्थान का चयन अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण कदम है।

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उद्योग स्थापना संबंधी स्थान के चुनाव में स्वयं द्वारा उत्पादित वस्तु की बाजार संभावना, इस क्षेत्र में विद्यमान व्यापारिक वातावरण, क्षेत्र के लोगों की रूचि आदि बातों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
स्थान चयन के पश्चात् उत्पादित वस्तु के कच्चे माल की उपलब्धता, बाजार की निकटता आदि पर भी ध्यान देना होता है। स्थान ऐसा होना चाहिये, जहां न केवल उत्पादित वस्तु के कच्चे माल के मिलने में सुविधा हो, बल्कि संबंधित वस्तु के बाजार की भी निकटता हो। वैसे लघु उद्योग के स्थान के चयन में नये उद्यमी को संबंधित राज्य के उद्योग निदेशालय या राज्य औद्योगिक विकास निगमों से संपर्क स्थापित कर मदद लेनी चाहिये।

लघु उद्योग की स्थापना किसी औद्योगिक क्षेत्र में ही करना अधिक उपयुक्त रहता है क्योंकि वहां न केवल बिजली, पानी आदि की सुविधाएं ही आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं बल्कि कच्चे माल की उपलब्धता, परिवहन की सुविधा आदि भी आसानी से मिल जाती है।
लघु उद्योग स्थापना के लिए अपनी कार्यशील पूंजी उपलब्ध होने की दिशा में कई बार बड़ी कठिनाई का सामाना करना पड़ता है।

अत:

विभिन्न सरकारी योजनाओं के बहुत कम ब्याज एवं आसान शर्तों पर दिये जाने वाली ऋण सुविधा का लाभ उठाने में उद्यमी को नहीं चूकना चाहिए।

सामान्यत:

लघु उद्योगों के लिए संबंधित जिला के जिला उद्योग अधिकारी के कार्यालय से राजकीय सहायता अधिनियम के अंतर्गत ऋण मिलने में सहायता मिलती है।

लघु उद्योग चलाने हेतु प्रशिक्षण की सुविधा भी प्राय: सभी जिलों में उपलब्ध होती है।

अत:

जो व्यक्ति लघु उद्योग लगाने के इच्छुक होते हैं, वे इस संदर्भ में प्रशिक्षण प्राप्त कर लाभान्वित होते हैं। प्रशिक्षण के अंतर्गत कार्यालय प्रबंध, कारखाना संगठन, बाजार व्यवस्था, कर्मचारी प्रबंधन आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण की सुविधा हेतु संबंधित क्षेत्र के समान इंडस्ट्री सर्विस इंस्टीट्यूट अथवा विस्तार केंद्र से संपर्क स्थापित किया जा सकता है।

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अपनी इच्छाशक्ति को जगाकर लघु उद्योग की स्थापना हेतु प्रेरित होने पर लघु उद्योग की स्थापना का कार्य कोई मुश्किल कार्य नहीं है। साहस, सूझबूझ और उचित प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रारंभ किया गया लघु उद्योग शीघ्र ही उचित फल प्रदान करता है।

वर्तमान में बेरोजगारी की सुरसा से बचाव हेतु लघु उद्योग की स्थापना निस्संदेह बुद्धिमतापूर्ण कार्य है क्योंकि इससे न सिर्फ स्वयं रोजगार की व्यवस्था होती है, बल्कि कई अन्य व्यक्तियों को भी इससे रोजगार मिलता जाता है।

परिवार और राष्टÑ को समृद्धशाली बनाने की दिशा में यह नितांत आवश्यक है कि नौकरी की तलाश में समय बर्बाद कर उद्योग स्थापित किया जाए।
– आनंद कुमार अनंत