बचें विद्युत दुर्घटना से :
जो बिजली घर में उजाला लाती है, जीवन में सुविधा शब्द को जिसने नये आयाम दिये हैं वही बिजली अपने में कितनी अनिष्ट आशंकाएं छिपाएं रहती है, इसे शायद आप और हम इसलिए नहीं जान पाते, क्योंकि हमारे देश में इस तरह के कोई सर्वेक्षण नहीं होते कि साल भर में विद्युत दुर्घटनाओं में कितने लोग आहत हुए। फिर भी आए दिन बिजली का कोई न कोई हादसा दहशत पैदा कर ही जाता है।

विद्युत दुर्घटना का अर्थ है ए.सी. या डी.सी. करंट द्वारा तार या साकेट छुए जाने पर बिजली का शरीर से गुजरना और ऐसा तेज झटका लगना या पकड़ लिया जाना जो प्राणघाती हो या जीवन भर के लिए अपंगता का कारण बने। विद्युत दुर्घटना में शार्ट सर्किट अथवा विद्युत उपकरणों में स्फुलिंग या ताप वृद्घि से आग लगने से होने वाली हानि भी शामिल हैं। घटिया क्वालिटी के उपकरणों के बिजली से संपर्क करने से कभी चलने कभी रूकने से भी दुर्घटनाएं होती हैं।

दुर्घटनाएं रोकने का पहला उपाय है उन कारणों या संभावनाओं का पता लगाना जहां दुर्घटनाओं की आशंका हो। विद्युत दुर्घटना के वाहक वे विद्युत तार, प्लग एडाप्टर व स्विच साकेट हो सकते हैं जिनसे हो कर बिजली गुजरती है। लैंप, हीटर, इलैक्ट्रिक इस्त्री, गीजर, मिक्सर, इमर्सन राड जैसे दैनिक प्रयोग के घरेलू उपकरणों से भी कभी और बड़ी दुर्घटनाएं घटती हैं।

विद्युत हादसों का कारण लापरवाही भी हो सकती है, लेकिन ज्यादातर दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार घटिया क्वालिटी का समान होता है। पूर्व में जब बिजली के सामानों और उपकरणों का सर्वेक्षण किया गया, तब चौंका देने वाले परिणाम सामने आये थे। बाजार में उपलब्ध अस्सी प्रतिशत से ज्यादा बिजली के सामान व उपकरण न केवल घटिया क्वालिटी के है वरन खतरनाक भी हैं।

घरेलू उपयोग के समस्त विद्युत उपकरणों में या तो गुणवत्ता का प्रतीक आई.एस.आई. का चिन्ह होना चाहिए या फिर उनको उद्योग निदेशालय से गुणवत्ता का प्रमाण पत्र मिला होना चाहिए।

उपकरण जिनके लिए यह क्वालिटी कंट्रोल अनिवार्य है, वे हैं विद्युत इमर्शन वाटर हीटर, आटोमेटिक विद्युत वाटर हीटर, घरेलू इस्तेमाल के स्विच, कॉपर ओर एल्युमीनियम कंडक्टरयुक्त रबड़मढी तारे, विद्युत इस्तरी, स्टोव, हॉट प्लेट, मिक्सर, टोस्टर, कॉफी परकोलेटर, बिजली की केतली, वाशिंग मशीन हेयर डायर, शेवर, कुकिंग ओवर, थ्रीपिन फ्लग, सॉकेट, टेप आदि।

अच्छे विद्युत उपकरण में यह व्यवस्था होनी चाहिए कि उसमें नमी जमा न होने पाये। इसका संचालन इस तरह का जटिल और खतरनाक नहीं होना चाहिए कि इस्तेमाल करने वाले से कहीं कोई चूक हो व भयंकर परिणाम सामने आयें। उपकरण में संचालन के दौरान गर्म होने का दोष नहीं होना चाहिए। अत: विद्युत सामग्री खरीदते समय इन बातों की भी यथासंभव परख कर लेनी चाहिए।

विद्युत से सदा सतर्क व सावधान रहने की आवश्यकता है। जरा सी भी असावधानी के भयंकर परिणाम हो सकते है।

सावधानी हेतु कुछ उपाय –

■ बिजली के तारों और प्लगों पर नियमित रूप से नजर रखिए कि कहीं कोई टूट फूट या क्षति तो नहीं हुई है। यदि साकेट में टूट- फूट हो तथा दीवार में सीलन हो तो किसी योग्य इलेक्ट्रीशियन की सलाह लीजिए। बिजली के उपकरण चलाते समय हमेशा रबर की चप्पलें पहनें और ध्यान रखें कि हाथ गीले न हों।

अगर उपकरण ठीक से काम न कर रहा हो तो उसकी जांच करने से पहले साकेट से इसका संबंध विच्छेद कर दें। प्लग के साथ लगे उपकरण में किसी भी सूरत में खराबी न हो, पहले ही जांच कर लें।

■  हमेशा थ्री पिन प्लग का प्रयोग करें। गीली सतह पर विद्युत उपकरणों को कतई न रखें।

■  आई.एस.आई. चिन्ह युक्त उपकरण ही खरीदें। जहां तक संभव हो, घटिया व बेनामी कंपनियों के उत्पादनों की खरीद से बचें।

■  विद्युत उपकरणों को जब चलायें तो उन पर निगरानी भी रखें। उन्हें चलता छोड़कर भूल मत जाइए।

■  विद्युत पोलों के तारों अथवा उपकरणों से चिंगारी निकलने की स्थिति में स्वयं को व अन्य को उस स्थल से दूर रखें तथा तुरंत ही इस बाबत संबंधित विद्युत केंद्र में सूचना दें।

■  विद्युत लाइनों के नीचे आतिशबाजी न करें। इससे तार टूटने के फलस्वरूप दुर्घटना होने का खतरा है।

■ सजावट के लिए फिट किये गये विद्युत वाहिनी तार जमीन से इतनी ऊंचाई पर रहे जिससे औसत ऊंचाई वाला व्यक्ति उसे छू न सके।

– शेख नवाब उस्मानी