कामयाब यूं ही नहीं बनते :

सफलता हेतु महत्त्वाकांक्षी होना अति आवश्यक है। आवश्यकता से अधिक महत्त्वाकांक्षी होना भी ज्यादा अच्छा नहीं और कम होना भी ठीक नहीं। यह तो सभी जानते हैं कि हर चीज की ‘अति’ बुरी होती है। जरूरत से अधिक महत्त्वाकांक्षी होने पर यदि उतनी सफलता न मिले तो इंसान निराश हो जाता है और कम महत्त्वाकांक्षी होने पर अधिक सफलता हाथ नहीं लगती।

कई लोग अधिक परिश्रम करते रहते हैं और उतनी सफलता उन्हें नहीं मिल पाती। ऐसा क्यों? क्या आपने कभी सोचा है कि कामयाब व्यक्ति में ऐसे क्या गुण होते हैं जो उन्हें सफल बनाते हैं और भीड़ में अपनी खास पहचान बनाते हैं? यदि आप उन सिद्धांतों को नहीं जानते तो उन्हें ढूंढने का प्रयास करें और सफलता की सीढियां आप भी चढ़ें।

पता चल जाएगा कि महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति इस प्रकार कामयाबी हासिल कर सकते हैं।

■ जब भी स्वयं को योग्य साबित करने का अवसर मिले, उसे व्यर्थ न गवाएं, क्योंकि ऐसे अवसर बार-बार नहीं मिलते।

■  उम्मीद से अच्छा काम करने का प्रयास करें, तभी आप सफल होंगे। अच्छा काम तो बहुत से लोग करते हैं पर उम्मीद से अच्छा सभी नहीं करते। ऐसे में वही सफल होते हैं जो उम्मीद पर खरे उतरते हैं।

■  कार्यालय में या व्यवसाय में भी तभी आगे बढ सकते हैं यदि आप क्षमता से अधिक काम करें। यदि आप कामकाजी हैं तो अपनी क्षमता से ज्यादा काम करें ताकि पदोन्नति की राह में कोई रुकावट न आ सके।

■  हमेशा डरते ही न रहें कि कुछ गलत न हो जाए। ऐसे लोग कुछ कर ही नहीं पाते, फिर कामयाबी कहां से मिलेगी। इसलिए अपनी रचनात्मक क्षमता का प्रयोग कर कुछ करने का प्रयास करें।

■  अपने सीमित दायरे से बाहर निकलकर कुछ करने का प्रयास करें ताकि पदोन्नति पा सकें। अपने काम तो निपटाएं ही, कुछ नया भी सीखें और करें।

■  जब आप घर छोड़कर बाहर काम के लिए निकलें तो व्यक्तिगत समस्याओं को घर पर ही छोड़ दें। यदि आप उस बोझ को लिए हुए काम करेंगे तो काम में मन नहीं लगेगा और आपकी परफारमेन्स पिछड़ जाएगी।

■  अपने से सीनियर कर्मचारी के पास बार-बार अपनी समस्याएं लेकर न जाएं, इसका आपके व्यक्तित्व पर उलटा प्रभाव पड़ेगा और एक दिन उन्हें महसूस होगा कि फलां व्यक्ति अपना दायित्व निभाने के योग्य नहीं है!

■  मित्र हमेशा उन्हें ही बनाएं जो सकारात्मक नजरिया रखते हों। वे आवश्यकता पड़ने पर आपको सही मार्ग दिखाएंगे और हर कदम पर आपकी मदद भी करेंगे।

■  अपना नजरिया भी आशावादी रखें ताकि छोटी-छोटी परेशानियों पर आसानी से काबू पा सकें। परेशानियों से न घबरा कर अपनी महत्त्वाकांक्षा को पूरा करने का भरसक प्रयास करें।

■  अधिक और कम बोलना दोनों ही बातें ठीक नहीं हैं। ज्यादा बोलने वाले को बातूनी या चापलूस समझा जाता है और कभी-कभी अधिक बोलने से कुछ गलत भी निकल जाता है जो नुकसान पहुंचा सकता है और कम बोलने वाले को घमंडी या अक्षम माना जाता है! इसलिए अपने विचारों को व्यक्त तो करें पर संभलकर।

■  कामयाबी हमेशा पिछले कामों का पुरस्कार नहीं होती। यह भविष्य हेतु लक्ष्य पाने का रास्ता भी हैं, वहीं इसलिए काम दिल से करिए और देखिए, कामयाबी आपके कदम चूमेगी। – अशोक वर्मा